

Shri Vitthal Nirmal Dindi Award 2026 Winners List: देवशयनी आषाढ़ी एकादशी के पावन पर्व पर महाराष्ट्र की आध्यात्मिक राजधानी पंढरपुर भक्ति के रंग में सराबोर नजर आई। लाखों की संख्या में पहुंचे वारकरी संप्रदाय के श्रद्धालुओं भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी के दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंचे। इस पूरे भक्ति के संमागम का अहम हिस्सा होता है वारकारी दिंडी। इस दिंडियों में वर्ष स्वच्छता और सामाजिक चेतना का एक विशेष नजारा देखने को मिला। पंढरपुर के पवित्र स्थल पर आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 'श्री विट्ठल निर्मल दिंडी पुरस्कार 2026' के विजेताओं को सम्मानित किया।
यह पुरस्कार उन दिंडियों (पैदल तीर्थयात्रियों के समूहों) को प्रदान किया जाता है, जो सदियों पुरानी पायी वारी परंपरा का पालन करने के साथ-साथ मार्ग में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और विभिन्न सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का सराहनीय काम करते हैं।
देवशयनी आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सामाजिक जागरूकता और स्वच्छता का संदेश देने वाली 'निर्मल दिंडियों' को सम्मानित किया। जानें कौंडण्यपुर, जालना और आलंदी की इन विजेता दिंडियों की पूरी कहानी।
समारोह के दौरान आषाढ़ी वारी 2026 के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष तीन दिंडियों को नकद राशि और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया:
इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पत्नी अमृता फडणवीस के साथ आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर सोलापुर जिले के पंढरपुर स्थित भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी के मंदिर में शासकीय पूजा की। विधि-विधान से शासकीय महापूजा संपन्न होने के बाद भगवान श्री विट्ठल और माता रुक्मिणी की आरती की गई और उनके चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
इस अवसर पर मंत्री गिरीश महाजन, जयकुमार गोरे और आकाश फुंडकर, विधायक समाधान अवताडे, विट्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति के सह-अध्यक्ष गहिनीनाथ महाराज औसेकर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस साल पंढरपुर वारी ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। भक्तों की कतार 25 किलोमीटर से भी लंबी हो गई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया किया सभी वारकरियों के लिए बेहतरीन इंतजाम किए गए हैं। भक्त भगवान विट्ठल का नाम जपते हुए दर्शन कर रहे हैं। दुनिया में खुशी का ऐसा कोई दूसरा उत्सव नहीं है, जहां लाखों 'वारकरी' बिना किसी औपचारिक निमंत्रण के भगवान विठुराया की एक झलक पाने के लिए पैदल ही निकल पड़ते हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि हर साल लाखों भक्त भगवान पांडुरंग का आशीर्वाद लेने पंढरपुर आते हैं। भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए एक बड़ा परिसर बनाना और जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करना समय की जरूरत बन गया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस साल पंढरपुर मंदिर कॉरिडोर का काम शुरू किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद, दर्शन की प्रक्रिया बहुत आसान, व्यवस्थित और सुचारू हो जाएगी।