

Karlai Tarkarli Inland Waterways Maharashtra: सिंधुदुर्ग जिले में अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक फेरीबोट सेवा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना के शुरू होने से सड़क मार्ग से लंबा सफर करने वाले यात्रियों को जलमार्ग के जरिए कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
मत्स्यव्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने मंत्रालय में आयोजित बैठक में प्रस्तावित फेरीबोट परियोजना की समीक्षा की। पहले चरण में कर्लाई से तारकर्ली के बीच प्रायोगिक आधार पर फेरी सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस मार्ग पर सड़क से लगने वाले करीब डेढ़ से दो घंटे के सफर को जलमार्ग से महज 15 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जिले में फेरी सेवा के लिए पांच संभावित जलमार्गों की पहचान की गई है। इनमें कर्लाई-तारकर्ली, काली-देवबाग, देवबाग-निवती, विजयदुर्ग-अनुसरे-दांडे और आरोंदा-किरणपाणी मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा।
अधिकारियों को अंतिम मार्ग तय करने से पहले जेट्टी की उपलब्धता, भरती-ओहोटी, पानी की गहराई और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा यात्रियों तथा वाहनों की संभावित मांग का भी सर्वेक्षण किया जाएगा, ताकि सेवा को व्यावहारिक और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके।
प्रस्तावित आधुनिक फेरी करीब 20 मीटर लंबी और 7.5 मीटर चौड़ी होगी। इसमें यात्रियों के साथ चारपहिया और दोपहिया वाहन ले जाने की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे स्थानीय नागरिकों के साथ पर्यटकों को भी आवागमन का एक वैकल्पिक साधन मिलेगा।
फेरीबोट के निर्माण पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए बीओओ, बीओटी या पीपीपी मॉडल में से उपयुक्त विकल्प का चयन किया जाएगा। परियोजना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए मॉडल का चयन अध्ययन के बाद किया जाएगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऑपरेटर पर चालक दल की नियुक्ति, दैनिक संचालन, रखरखाव और बीमा की जिम्मेदारी होगी। वहीं मार्ग, आवश्यक अनुमति, बुनियादी सुविधाओं के उपयोग और ईंधन खर्च से संबंधित जिम्मेदारी सरकार संभालेगी। किराया और फेरी की समय-सारणी पर भी सरकार का नियंत्रण रहेगा।
सिंधुदुर्ग शहर में फेरी सेवा शुरू होने से जिले के पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ स्थानीय जहाज निर्माण, समुद्री इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। यदि प्रस्तावित परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में जिले के अन्य जलमार्गों पर भी ऐसी सेवाओं का विस्तार किया जा सकता है।