'स्वतंत्र्यवीर' सावरकर को सरकार ने नहीं दी थी यह उपाधि! पोते सात्यकी सावरकर ने पुणे कोर्ट में किया बड़ा खुलासा

Savarkar Defamation Case: वीर सावरकर मानहानि मामले में उनके पोते सात्यकी सावरकर ने पुणे की अदालत में गवाही दी कि 'स्वतंत्र्यवीर' की उपाधि सरकारी नहीं बल्कि एक लेखक द्वारा दी गई थी।
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वीर सावरकर, इनसेट- सात्यकी सावरकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Satyaki Savarkar On Veer Savarkar: स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणियों से जुड़े मानहानि मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुणे की विशेष अदालत (सांसद/विधायक न्यायालय) में सुनवाई के दौरान सावरकर के पोते, सात्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वतंत्र्यवीर' की उपाधि किसी सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से प्रदान नहीं की गई थी।

सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है 'स्वतंत्र्यवीर' का जिक्र

न्यायाधीश अमोल शिंदे की अदालत में जिरह के दौरान सात्यकी सावरकर ने स्पष्ट किया कि सावरकर को 'स्वतंत्र्यवीर' की उपाधि लेखक सदाशिव रानडे ने दी थी, जिन्होंने सावरकर की जीवनी लिखी थी। जब उनसे पूछा गया कि क्या जनता ने यह उपाधि दी थी, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास इस दावे को साबित करने के लिए कोई आधिकारिक या ठोस दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। उन्होंने अदालत में स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं एक लेखक हूं, इतिहासकार नहीं।"

लंदन प्रवास और गुप्त लेखन पर चर्चा

सुनवाई के दौरान सावरकर के लंदन प्रवास पर भी चर्चा हुई। सात्यकी ने कोर्ट को बताया कि वीर सावरकर शिक्षा के लिए लंदन गए थे और वहां लगभग चार साल रहे। उस दौरान उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों और ब्रिटिश प्रशासन से बचने के लिए कई लेख और पुस्तकें छद्म नामों (दूसरों के नाम) से प्रकाशित करवाई थीं। हालांकि, सात्यकी ने यह भी माना कि भारत और लंदन के पुस्तकालयों में उनकी कई पुस्तकें शोध के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें सटीक रूप से क्या लिखा है, इसकी पूरी जानकारी उनके पास नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी लड़ाई राहुल गांधी के उस भाषण से शुरू हुई जो उन्होंने 5 मार्च 2023 को यूनाइटेड किंगडम में 'ओवरसीज कांग्रेस' के एक कार्यक्रम में दिया था। सात्यकी सावरकर का आरोप है कि राहुल गांधी ने सावरकर पर जानबूझकर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए। राहुल ने कथित तौर पर कहा था कि सावरकर ने अपनी एक किताब में एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई का जिक्र किया है। सात्यकी का दावा है कि सावरकर ने कभी ऐसा कुछ नहीं लिखा और गांधी ने उनकी छवि धूमिल करने के लिए यह आधारहीन बात कही।

शिकायतकर्ता ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 के तहत मानहानि का मामला दर्ज कराया है और सबूत के तौर पर भाषण के वीडियो और समाचार पत्रों की कतरनें पेश की हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 13 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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