पुणे में जल संकट पर सियासी संग्राम, 932 करोड़ बकाया पर पानी बंद करने की चेतावनी

Water Crisis: पुणे में जल संकट के बीच जल संसाधन विभाग ने 932 करोड़ रुपये बकाया को लेकर महानगरपालिका को नोटिस भेजा है। खडकवासला डैम से अतिरिक्त पानी उठाने के आरोप ने राजनीतिक विवाद को हवा दी है।
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पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune Water Crisis News Update: पुणे में गर्मियों की दस्तक के साथ ही जल संकट की पुरानी कहानी एक बार फिर दोहराई जाने लगी है, लेकिन इस बार का परिदृश्य राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से काफी पेचीदा नजर आ रहा है।

हर साल की तरह इस बार भी पुणेकरों को दो तरफा दबाव का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर प्रशासन नागरिकों को पानी की बचत करने की नसीहत दे रहा है और चेतावनी दे रहा है कि लापरवाही बरतने पर पानी की कटौती की जाएगी, तो दूसरी ओर राज्य के जल संसाधन विभाग ने पुणे महानगरपालिका को एक कड़ा नोटिस भेजकर बकाया पानी बिल का भुगतान नहीं करने की स्थिति में सप्लाई बंद करने की सीधी धमकी दे दी है। लेकिन पुणे की जनता के लिए यह सालाना प्रक्रिया अब सामान्य हो चुकी है, लेकिन इस वर्ष की स्थिति ने स्थानीय राजनीति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पानी के नाम पर नागरिकों को डराने का प्रयास

इस समय पुणे की राजनीतिक कमान पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के हाथों में है। शहर के सांसद, छह विधायक और महानगरपालिका के 119 नगरसेवक भाजपा से जुड़े हैं। इतना ही नहीं, राज्य के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल भी इसी पार्टी के एक दिग्गज और वरिष्ठ नेता है।

ऐसे में यह बात नागरिकों को काफी खल रही है कि जब केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर एक ही पार्टी की सत्ता है, तो फिर जल संसाधन विभाग पुणे की जनता को इस तरह डराने वाले नोटिस कैसे भेज पा रहा है।

आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि भाजपा का कोई भी स्थानीय नेता या जनप्रतिनिधि अपने ही मंत्री या विभाग के इस रुख के खिलाफ खुलकर बोलने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। इस खामोशी ने पुणे के नागरिकों के मन में एक गहरा असंतोष पैदा कर दिया है कि क्या उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के लिए जनता की भावनाओं की कोई कीमत नहीं है।

शहर का पानी बंद करने की चेतावनी

जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल अक्सर बैठकों और सार्वजनिक मंचों पर पुणे के पानी के उपयोग को लेकर सख्त टिप्पणी करते रहे हैं। वे एक ओर तो यह आश्वासन देते हैं कि वे पुणे को प्यासा नहीं रहने देंगे, लेकिन दूसरी ओर वे पुणे महानगरपालिका द्वारा किए जा रहे पानी के' अत्यधिक' और 'बेहिसाब इस्तेमाल पर सार्वजनिक रूप से उंगली उठाते हैं।

मंत्री की इस मुखर आलोचना के बावजूद स्थानीय भाजपा नेता चुप्पी साधे रहते हैं। हाल ही में हुई महानगरपालिका की बैठक में भी यही नजारा देखने को मिला, जहां नगरसेवकों ने अपने-अपने वार्डों में पानी की किल्लत को लेकर प्रशासन पर तो खूब भड़ास निकाली, लेकिन जल संसाधन विभाग द्वारा भेजे गए उस नोटिस का जिक्र तक नहीं किया जिसमें शहर का पानी बंद करने की बात कही गई थी।

आंकड़ों के खेल में उलझा विवाद

आंकड़ों के खेल में उलझा यह विवाद अब 932 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बकाया तक जा पहुंचा है। जल संसाधन विभाग का दावा है कि पुणे महानगरपालिका खडकवासला डैम से निर्धारित कोटे से कहीं ज्यादा पानी उठा रही है, लेकिन उसका भुगतान समय पर नहीं कर रही है। विभाग के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान पुणे ने अपने स्वीकृत कोटे से लगभग 8।84 टीएमसी अतिरिक्त पानी का उपयोग किया है।

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