Pune Municipal Corporation ड्रेनेज प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप, नैमित्तिक समिति से जांच की मांग

Pune Municipal Corporation के ड्रेनेज विभाग पर 3000 करोड़ रुपये के खर्च को लेकर विवाद बढ़ गया है। पूर्व नगरसेवकों ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाकर जांच की मांग की है।
Pune Monsoon Preparation Drain Cleaning Work Delay
पुणे ड्रेन सफाई में देरी (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Pune Municipal Corporation Drainage Scam: पुणे महानगर पालिका के ड्रेनेज विभाग द्वारा पिछले चार वर्षों में किए गए भारी-भरकम खर्च अब विवादों के घेरे में आ गए हैं।

पूर्व विपक्षी नेता उज्ज्वला केसकर, सुहास कुलकर्णी और पूर्वी नगरसेवक प्रशांत बधे ने विभाग की कार्यप्रणाली पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाते हुए।

इस पूरे मामले की 'नैमित्तिक समिति' (विशेष आकस्मिक समिति) के माध्यम से गहन जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में महापौर मंजुषा नागपुरे को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें ड्रेनेज कार्यों पर हुए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के व्यय को संदेहास्पद बताया गया है। प्रशासक राज के दौरान ड्रेनेज विभाग का वार्षिक बजट करीब साढ़े सात सौ करोड़ रुपये था, जिसके आधार पर चार वर्षों मे 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

Pune में विकास निधि में 289 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान

जायका (जेआईसीए) परियोजना के नाम पर भी चालू वर्ष के अंत तक 900 करोड़ रुपये का भारी खर्च दिखाया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अन्य विकास कार्यों के बजट में कटौती कर ड्रेनेज के लिए 289 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान करना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

280 करोड़ रुपये की निधि के उपयोग पर आपत्ति

महापौर को सौंपे गए ज्ञापन में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण अभियान के तहत दी गई 280 करोड़ रुपये की निधि के उपयोग पर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवंटित 125 करोड़ रुपये के खर्च का कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।

विडंबना यह है कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी महानगर पालिका में शामिल हुए नए नौ गांवों समेत शहर के कई इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था आज भी बदहाल बनी हुई है, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करती है।

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