

नागपुर के गोरेवाडा केंद्र से एक बाघ और बाघिन पुणे लाए गए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान दोनों का रेस्क्यू किया गया था।
चिकित्सा जांच पूरी, फिलहाल नाम और दर्शकों के लिए उपलब्धता तय नहीं।
Rajiv Gandhi Zoological: कात्रज स्थित राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय में वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। नागपुर के गोरेवाडा वन्यजीव बचाव केंद्र से एक साढ़े चार साल के बाघ और साढ़े तीन साल की बाघिन को गुरुवार को सुरक्षित पुणे लाया गया।
दोनों को विशेष व्यवस्था के तहत प्राणी संग्रहालय में स्थानांतरित किया गया है। उनके आने से यहां वन्यजीवों को देखने आने वाले लोगों को बाघों को करीब से देखने का एक और अवसर मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, दोनों बाघों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के दौरान रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद उन्हें नागपुर के गोरेवाडा वन्यजीव बचाव केंद्र में रखा गया था। केंद्र में बाघों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक होने के कारण उन्हें दूसरे स्थान पर भेजने की आवश्यकता महसूस हुई। संबंधित अधिकारियों की मंजूरी के बाद दोनों को पुणे के राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य बचाव केंद्र में बाघों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ वन्यजीवों की देखभाल के लिए उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर उपयोग करना है।
पुणे शहर लाए जाने के दौरान दोनों बाघों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई। पशु चिकित्सा अधिकारी घनश्याम मोहन पवार के नेतृत्व वाली टीम ने उनकी आवश्यक चिकित्सा जांच पूरी की। स्थानांतरण के दौरान उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा गया।
प्राणी संग्रहालय के निदेशक डॉ. राजकुमार जाधव ने भी इस संबंध में जानकारी दी। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली की मंजूरी के बाद दोनों बाघों को पुणे शहर लाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय प्रशासन के अनुसार, नए बाघ और बाघिन के नाम अभी तय नहीं किए गए हैं। फिलहाल उनकी देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्हें दर्शकों के लिए कब उपलब्ध कराया जाएगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
दोनों बाघों का स्थानांतरण वन्यजीव बचाव केंद्रों के बीच समन्वय और रेस्क्यू किए गए जानवरों की देखभाल के महत्व को दर्शाता है।