पुणे में मासूमियत का कत्ल, नसरापुर के बाद चाकण में दरिंदगी, 3 साल के बच्चे के साथ कुकर्म फिर गला रेतकर हत्या

Pune Crime News: पुणे में मासूमियत का कत्ल, नसरापुर के बाद अब चाकण में 3 साल के बच्चे के साथ दरिंदगी और हत्या। समाज को झकझोर देने वाली दो घटनाओं ने उठाए सुरक्षा पर सवाल। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
The Murder of Innocence in Pune: Following Nasrapur, Brutality Strikes Chakan 3-Year-Old Child Sexually Abused, Then Murdered by Slitting the Throat.
महालुंगे पुलिस स्टेशन की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chakan Child Abuse: महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाने वाला पुणे शहर इस समय दो ऐसी वारदातों से थर्रा उठा है, जिन्हें सुनकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कांप जाए। अभी पुणे के नसरापुर में एक 4 साल की बच्ची के साथ हुई हैवानियत का घाव भरा भी नहीं था कि चाकण के महालुंगे इलाके से एक और खौफनाक खबर सामने आ गई। यहाँ एक 3 साल के मासूम बच्चे की न केवल गरिमा तार-तार की गई, बल्कि उसकी गला रेतकर हत्या कर दी गई।

खिलौनों की उम्र में मिली मौत

चाकण के महालुंगे इलाके में रहने वाला एक मजदूर परिवार, जो मध्य प्रदेश से रोजी-रोटी की तलाश में यहाँ आया था, उसने कभी नहीं सोचा था कि उनका 3 साल का चिराग इस तरह बुझ जाएगा। शुक्रवार दोपहर जब बच्चा अचानक गायब हुआ, तो माँ उसे पागलों की तरह ढूंढने लगी। लेकिन जब बच्चा मिला, तो वह मंजर देख पूरा इलाका सुन्न रह गया। एक पड़ोसी कमरे में उस मासूम का शव पड़ा था, जिसका गला चाकू से बेदर्दी से रेता गया था। जांच में पता चला कि हत्या से पहले बच्चे के साथ कुकर्म (Sodomy) किया गया था। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि महज 16 साल का एक किशोर है। वारदात के बाद वह बिहार भागने की फिराक में था, लेकिन पुणे रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने उसे दबोच लिया। एक बच्चा जो अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीखा था, वह उस वहशीपन का शिकार हो गया जिसे समाज का कलंक कहा जाता है।

नसरापुर: गुस्सा, आंसू और न्याय की मांग

चाकण की घटना से ठीक पहले नसरापुर गाँव में एक 4 साल की बच्ची के साथ भी ऐसी ही दरिंदगी हुई थी। वहां के आरोपी की उम्र 65 साल थी, जिसने पोते-पोतियों की उम्र की बच्ची के साथ हैवानियत की। शनिवार को नसरापुर गाँव में सन्नाटा तो था, लेकिन लोगों के दिलों में आक्रोश की आग धधक रही थी। गाँव वालों ने अपनी दुकानें और धंधे बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया। वहां का माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई। लोगों की एक ही मांग है, हत्यारे को फाँसी दो, या उसे हमारे हवाले करो। समाज का यह गुस्सा जायज है क्योंकि जब कानून का खौफ खत्म हो जाता है, तो लोग इसी तरह सड़कों पर उतरते हैं।

मानवीय संवेदनाओं पर सवाल

ये दोनों घटनाएं समाज के उस अंधेरे कोने की ओर इशारा करती हैं जहाँ न उम्र का लिहाज बचा है और न ही रिश्तों की पवित्रता। एक तरफ 65 साल का बुजुर्ग है और दूसरी तरफ 16 साल का किशोर दोनों ही मामलों में शिकार वह मासूम बने जिन्हें अभी दुनिया की बुराई का अहसास तक नहीं था।

प्रवासी मजदूरों के बच्चे, जो अक्सर असुरक्षित माहौल में पलते हैं, उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा सवाल बन गई है। क्या हम एक ऐसा समाज बन रहे हैं जहाँ बच्चों का घर के बाहर कदम रखना मौत को दावत देना है?

पुलिस की कार्रवाई

पिंपरी चिंचवाड़ और पुणे ग्रामीण पुलिस ने दोनों ही मामलों में तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में सख्त से सख्त धाराएं लगाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की कोशिश करेंगे। लेकिन सवाल फिर वही है क्या सजा मिलने से उन माँओं की गोद फिर से भर पाएगी जिनके आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे?

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