

Pune Abhijit Choudhary News: पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) के तहसील स्तरीय क्षेत्रीय कार्यालयों की बदहाली और अधिकारियों की लापरवाही के कारण आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों की सुविधा के लिए करोड़ों खर्च कर जो व्यवस्था बनाई गई थी, वह सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रही है। कहीं बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है, तो कहीं अधिकारी, कर्मचारी अपनी सीटों से गायब रहते हैं।
नागरिकों के आवेदनों पर महीनों कार्रवाई नहीं होती, बड़े अधिकारियों से संपर्क साधना असंभव हो जाता है और रोजमर्रा की शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इसके अलावा, इन खाली पड़े दफ्तरों के भारी-भरकम किराये व अन्य खर्चों को लेकर भी अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आवेदकों का सीधा आरोप है कि ये क्षेत्रीय कार्यालय जनता की मदद के लिए नहीं, बल्कि केवल कागजी दिखावे और फिजूलखर्ची के लिए चल रहे हैं।
जनता को राहत देने के उद्देश्य से पीएमआरडीए ने तहसील स्तर पर नौ क्षेत्रीय कार्यालयों का गठन किया था। इन सेंटर्स को शुरू करने का मुख्य लक्ष्य नागरिक समस्याओं का निवारण, निर्माण अनुमति, अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई और डाक संबंधी प्रशासनिक कार्यों को स्थानीय स्तर पर ही तेजी से निपटाना था। मगर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। अधिकांश केंद्रों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी ठप है, न पीने का पानी है, न शौचालय और न ही बैठने के लिए पर्याप्त जगह है।
विभिन्न बैठकों या फील्ड विजिट का बहाना बनाकर अधिकारी अक्सर गायब रहते हैं, जिससे पूरा कामकाज ठप पड़ा है। स्थानीय स्तर पर न्याय न मिलने से परेशान होकर अब लोग इन तहसील दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय सीधे आकुर्डी स्थित मुख्य मुख्यालय जाना बेहतर समझ रहे हैं। इससे साफ है कि बड़े विज्ञापनों और दावों के साथ शुरू की गई इस विकेंद्रीकरण योजना का मूल उद्देश्य ही पूरी तरह फेल हो चुका है, जिसका खामियाजा आम जनता को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के रूप में भुगतना पड़ रहा है।