

PMPML Financial Crisis Pune Public Bus Service: पुणेवासियों की जीवनदायिनी मानी जाने वाली पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड यानी पीएमपीएमएल इस समय बेहद गंभीर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही है। महामंडल का कुल खर्च उसकी कुल कमाई से लगभग दोगुना हो चुका है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पीएमपीएमएल पर करीब तीन सौ करोड़ रुपये की बकाएदारी की तलवार लटक रही है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह महत्वपूर्ण बस सेवा पूरी तरह से अब उधारी के भरोसे चलाई जा रही है।
ठेकेदारों के भुगतान, ईंधन बिल और अन्य परिचालन खचों को मिलाकर पीएमपीएमएल का वार्षिक खर्च 1610 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले महामंडल को महज 818 करोड़ रुपये की इनकम प्राप्त हुई है। हालांकि, प्रशासन द्वारा खर्च में कटौती और परिचालन में सुधार के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में बसों का परिचालन 11.67 करोड़ किलोमीटर था, जो अब बढ़कर 12.88 करोड़ किलोमीटर हो गया है। इस मामूली सुधार के कारण महामंडल का परिचालन घाटा कुछ हद तक कम हुआ है।
आंकड़ों के अनुसार, पीएमपीएमएल का सबसे बड़ा वितीय बोझ उसके कर्मचारियों का वेतन और किराए पर ली गई बसें हैं। कर्मचारियों के वेतन पर ही 790 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहे है, जो पुणे महामंडल की कुल यात्री आय से भी ज्यादा है। इसके अतिरिक्त, किराए की बसों का भुगतान करने के लिए 619.71 करोड़ रुपये से अधिक और ईंधन के लिए 108.79 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। लगातार बढ़ रहे इन खचों के कारण महामंडल की वित्तीय स्थिति दिनोंदिन और अधिक चिंताजनक होती जा रही है।
मार्च से जुलाई के बीच निजी ठेकेदारों के 129 करोड़ रुपये और गैस कंपनी के 63 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा, कर्मचारियों के ग्रेच्युटी और मेडिकल बिलों के भी करोड़ों रुपये अटके पड़े हैं। ठेकेदारों ने भुगतान के लिए पत्र भेज दिया है। यदि समय पर इस बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो भविष्य में पुणे शहर की सार्वजनिक बस सेवा बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।