

Pune Air Quality Environment Status Report: पुणे शहर में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, वाहनों की संख्या और निर्माण कार्य वायु गुणवत्ता को गंभीर संकट में धकेल रहे हैं। पुणे महानगर पालिका के पर्यावरण विभाग द्वारा पेश 'पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट 2025-26' ने शहर में बढ़ते प्रदूषण की चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में अधिकांश निगरानी केंद्रों पर पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से काफी अधिक दर्ज किया गया है।
स्थिति यह है कि प्रदूषण अब केवल व्यस्त इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हरित क्षेत्र माने जाने वाले पाषाण में भी पीएम-10 का वार्षिक औसत निर्धारित राष्ट्रीय सीमा को पार कर चुका है। शिवाजीनगर, लोहगांव, कात्रज और पुणे विश्वविद्यालय परिसर में भी यही हाल है।
पीएम 10 के कण श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि शिवाजीनगर और लोहगांव में मिले खतरनाक पीएम 2.5 कण हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर का बड़ा जोखिम पैदा कर रहे हैं। भारत में इसकी वार्षिक सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है, जबकि डब्ल्यूएचओ इसे मात्र 5 माइक्रोग्राम सुरक्षित मानता है। बेकाबू निर्माण गतिविधियों से बढ़ा प्रदूषण रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में पुणे शहर के नागरिकों को पूरे साल स्वच्छ हवा नहीं मिल पाई।
साल के 365 दिनों में से केवल 92 दिन ही हवा अच्छी श्रेणी में रही। शेष दिनों में 122 दिन संतोषजनक, 120 दिन मध्यम और 31 दिन हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई। इस प्रकार, पुणेवासियों को कुल 151 दिन मध्यम से खराब गुणवत्ता वाली हवा में सांस लेनी पड़ी। प्रशासन द्वारा शहर में बेकाबू निर्माण गतिविधियों और उड़ती धूल को इस बढ़ते प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण माना गया है।
| पर्यावरण संकेतक | स्थिति |
|---|---|
| अच्छी वायु गुणवत्ता (AQI) | 92 दिन |
| मध्यम या खराब वायु गुणवत्ता | 151 दिन |
| पीएम-10 | कई केंद्रों पर राष्ट्रीय मानक सीमा से ऊपर |
| पीएम-2.5 | शिवाजीनगर और लोहगांव में राष्ट्रीय सीमा से अधिक |
| जल प्रदूषण | प्रतिदिन 980 एमएलडी सीवेज उत्पन्न |
| सीवेज उपचार क्षमता | केवल 477 एमएलडी (लगभग 49% क्षमता) |