सुनेत्रा पवार की मौजूदगी में भी पार्थ पवार ले रहे बड़े फैसले, सीनियर नेताओं में नाराजगी

Parth Pawar Party Conflict: अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पार्थ पवार की बढ़ती सक्रियता से संगठन में असंतोष बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है।
सुनेत्रा पवार की मौजूदगी में भी पार्थ पवार ले रहे बड़े फैसले, सीनियर नेताओं में नाराजगी
पार्थ पवार और सुनेत्रा पवार (सौ. सोशल मीडिया )
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Parth Pawar Party Conflict Sunetra Pawar: पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद उनकी पार्टी में चल रहा अंदरूनी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शुरू में पार्टी के दो सीनियर नेताओं की भूमिका को को लेकर काफी विवाद हुआ।

वहीं अब ऐसी रिपोर्ट है कि अजित पवार के पुत्र पार्थ पवार अपनी मां सुनेत्रा पवार की भी नहीं सुन रहे हैं। कहा जा रहा है कि पार्थ अपने तरीके से पार्टी को कंट्रोल कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि भले ही कागज पर सुनेत्रा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लेकिन सारे बड़े फैसले पार्थ ले रहे हैं। लेकिन यह सीनियर नेताओं को रास नहीं आ रहा है। इन सब विवादों की वजह से अजित पवार की पार्टी का भविष्य अधर में लटक गया है। ऐसे आरोप है कि अजित पुत्र पार्टी के सीनियर सदस्यों को बिना बताए मीटिंग ले रहे हैं।

साथ ही पार्थ पवार काफी घमंड के साथ नेताओं से बात करते हैं। इन वजहों से पार्टी के सीनियर नेता बेहद नाराज हैं। सूत्रों के मुताबिक़ पार्थ पार्टी पर अपना कंट्रोल चाहते हैं। उन्हें लगता है कि कुछ नेताओं उनकी मां सुनेत्रा पवार को आगे कर पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपना चाबुक चलाना शुरू कर दिया है।

पटेल व तटकरे को किया दरकिनार

29 अप्रैल को सुनेत्रा पवार ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को एक लेटर भेजा था, जिसमें नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र स्टेट यूनिट चीफ सुनील तटकरे को 22-मेबर वाली नेशनल एग्जीक्यूटिव का हिस्सा बताया गया है, लेकिन उनके ऑफिशियल ऑर्गेनाइजेशनल टाइटल खाली छोड़ दिए गए है, और उन्हें पार्लियामेंट्री ग्रुप लीडर बताया गया। कहा जा रहा है कि पार्थ के कहने पर ही पटेल व तटकरे को इग्नोर किया गया था।

मंगलवार की मीटिंग में पार्थ का रवैया आक्रामक

मंगलवार को पार्टी की अहम बैठक के दौरान भी पार्थ का रवैया काफी आक्रामक रहा। पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार का मानना है कि सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की जरूरत है। लेकिन पार्थ ने अपनी अलग राह चुन ली है।

प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के बोलने से पहले पार्थ बैठक से बाहर निकल गए, हालांकि इस बैठक के दौरान तटकरे ने खुल कर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अजित पवार के निधन के बाद मैं और प्रफुल पटेल ने हालात को संभालने का काम किया लेकिन इसके बदले में हम दोनों की काफी आलोचना हुई। लेकिन ऐसे समय में पार्टी में कोई भी नेता हमारे साथ खड़ा नहीं रहा।

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