मुलशी के पानी पर घमासान: पुणे को 5 TMC देने के फैसले का विरोध, ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी

Pune Mulshi Dam: पुणे को मुलशी बांध से अतिरिक्त पानी देने की योजना पर विवाद गहराया। खडकवासला श्रृंखला के चारों बांधों में जल भंडार घटकर 16.03% रहा। ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी।
Dispute intensifies over diverting Mulshi Dam water to Pune PMC as Khadakwasla complex water levels drop to 16.03%, prompting protests from Mulshi villagers.
पुणे मुलशी बांध (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Pune Mulshi Dam Water project: पुणे शहर की तेजी से बढ़ती आबादी और हर साल गहराते जल संकट को दूर करने के लिए प्रस्तावित मुलशी डैम जल परियोजना अब बड़े क्षेत्रीय विवाद में बदलती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) को मुलशी बांध से अतिरिक्त 5 टीएमसी पानी देने की योजना के बाद मुलशी तहसील के ग्रामीणों और किसानों में भारी नाराजगी फैल गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर पुणे शहर के लिए अतिरिक्त जल आरक्षित करने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर मुलशी क्षेत्र के कई गांवों में नागरिकों को पांच-पांच दिनों तक पानी का इंतजार करना पड़ रहा है।

मुलशी के ग्रामीणों का कहना है कि दशकों पहले बांध निर्माण के लिए उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीनें और घर छोड़े थे, लेकिन आज वही लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई गांवों में टैंकरों के सहारे जलापूर्ति हो रही है और नलों में हर पांचवें दिन कुछ घंटों के लिए ही पानी आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार स्थानीय लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज कर शहरों और रियल एस्टेट परियोजनाओं को फायदा पहुंचाने के लिए पानी डायवर्ट कर रही है।

चारों बांधों में कुल जल भंडार केवल 16.03 प्रतिशत बचा

खडकवासला बांध श्रृंखला के 11 जून तक के आंकड़ों ने चिंता और बढ़ा दी है। चारों बांधों में कुल जल भंडार केवल 16.03 प्रतिशत यानी 4.67 टीएमसी रह गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 18.28 प्रतिशत यानी 5.33 टीएमसी था। खडकवासला बांध में 39.29 प्रतिशत यानी 0.78 टीएमसी, पानशेत में 20.22 प्रतिशत यानी 2.15 टीएमसी और वरसगाव बांध में 13.61 प्रतिशत यानी 1.47 टीएमसी पानी उपलब्ध है, टेमघर बांध में लगभग शून्य जल भंडार दर्ज किया गया है।

जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार के सामने मांग रखी है कि पुणे को पानी देने से पहले मुलशी तहसील के लिए अतिरिक्त 2 टीएमसी पानी आरक्षित किया जाए, उनका कहना है कि घरेलू जरूरतों, खेती और पशुपालन के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित किए बिना बाहरी क्षेत्रों को पानी देना अन्याय होगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगे नहीं मानी गईं तो बड़े स्तर पर आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।

मनपा व प्रशा‌निक स्तर पर भी फंसा है मामला

यह परियोजना प्रशासनिक स्तर पर भी उलझी हुई है। पुणे मनपा (पीएमसी), पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका (पीसीएमसी) और पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) के बीच पाइपलाइन निर्माण और जल वितरण के खर्च को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। पानी का कितना हिस्सा किस संस्था को मिलेगा, इस पर भी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।

हमारे पूर्वजों की जमीनें इन बांधों में गई है। चाहे टेमघर बांध हो या टाटा कंपनी का मुलशी बांध, त्याग मुलशी के लोगों ने किया है। आज तहसील के कई गांवों में लोगों को पांच-पांच दिनों बाद पानी मिल रहा है। दूसरी तरफ टाटा कंपनी पानी रोककर बिजली बेच रही है और सरकार वही पानी पुणे ले जाने की तैयारी कर रही है। हमें पुणेकरों को पानी देने का विरोध नहीं है, लेकिन पहले हमारे हक का सवा तीन टीएमसी पानी हमें मिलना ही चाहिए, हमें प्यासा रखकर पुणे को पानी नहीं ले जाने देंगे।

- प्रवीण साठे, पूर्व सरपंच, साठेसाई

पुणे शहर की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके मुकाबले पानी की आपूर्ति कम पड़ रही है। हर गर्मी में या जब बांधों का जलस्तर घटता है, तब पुणे में पानी कटौती करनी पड़ती है। हम भी कर भरते हैं, इसलिए हमें पीने का पर्याप्त पानी मिलना चाहिए। यदि मुलशी बांध से पानी मिलने वाला है, तो प्रशासन को पहले मलशी के लोगों को विश्वास में लेकर उनके पानी की समस्या का समाधान करना चाहिए और फिर इस परियोजना को जल्द पूरा करना चाहिए, ताकि पुणेकरों की पानी की समस्या बंद हो।

- कमलेश सोनवणे, स्थानीय पुणेकर

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