पुणे-पिंपरी में एसटी ‘जहां चाहें वहां यात्रा’ योजना को भारी प्रतिसाद, 5 महीनों में 4.24 लाख यात्राएं

Pune Pimpri Bus Travel Scheme: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एसटी की ‘जहां चाहें वहां यात्रा’ योजना को जबरदस्त प्रतिसाद मिला है। सिर्फ 5 महीनों में 4.24 लाख से अधिक यात्रियों ने इसका लाभ उठाया है।
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पार्थ पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
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MSRTC Wherever Travel Scheme: पुणे के चर्चित मुंढवा जमीन घोटाले की जांच के लिए गठित विकास खरगे समिति की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट आखिरकार महाराष्ट्र विधानमंडल के पटल पर रख दी गई है।

करीब 4,392 पन्नों की इस जंबो रिपोर्ट ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के पुत्र पार्थ पवार को स्पष्ट रूप से क्लीन चिट नहीं दी गई है।

समिति ने 7 महत्वपूर्ण बैठकें कीं

रिपोर्ट में उनके खिलाफ सीधे तौर पर किसी दंडात्मक कार्रवाई का जिक्र नहीं है, लेकिन भविष्य में होने वाली आपराधिक जांच के आधार पर उन पर कार्रवाई की तलवार अभी भी लटक रही है। खरगे समिति ने अपनी जांच के दौरान 7 महत्वपूर्ण बैठकें की और इस विस्तृत रिपोर्ट को तैयार करने के लिए 3 बार समय सीमा बढ़ाई गई। समिति ने अपनी सिफारिशों में दोषी अधिकारियों के प्रति बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

सरकारी नियमों की धज्जियां और जांच के निष्कर्ष

समिति की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण के लिए बाकायदा खरीद दस्तावेज पंजीकृत किए गए थे। इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व, मुद्रांक (स्टाम्प) और पंजीकरण विभाग के अधिकारियों की भारी लापरवाही और मिलीभगत पाई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग विभाग ने एनओसी देने के बजाय केवल 'इरादा पत्र' (लेटर ऑफ इंटेंट) संलग्न किया, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह इरादा पत्र जिलाधिकारी कार्यालय से किसी भी प्रकार का संपर्क किए बिना ही जारी कर दिया गया था, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

पार्थ पवार के संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान प्रशासनिक जांच के दायरे में उनका सीधा नाम नहीं लिया गया है, लेकिन मामले से जुड़े उनके चचेरे भाई दिग्विजय पाटिल को 'अमेडिया कंपनी' मामले में दोषी पाया गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि चूंकि उनके कार्यक्षेत्र में केवल प्रशासनिक जांव शामिल थी, इसलिए आपराधिक पहलुओं की सघन जांच स्वतंत्र रूप से की जानी चाहिए, यदि पुलिस की आगामी जांच में और अधिक लोगों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते है तो पार्थ पवार सहित अन्य संबंधितों पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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