

MPCB के 6 अधिकारी कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में निलंबित।
उद्योगों को पर्यावरणीय परमिट देने की प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप।
शिकायतों और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू।
स्थापना और संचालन सहमति जारी करने की प्रक्रिया जांच के दायरे में।
Maharashtra Pollution Control Board MPCB Officers Suspended: महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के छह अधिकारियों को उद्योगों को पर्यावरणीय परमिट जारी करने की प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद बोर्ड की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें मिलने और वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद जांच शुरू की गई थी।
निलंबित अधिकारियों में आरओ बाबासाहब कुकडे, डीआरओ नवनाथ अवताडे, कार्तिकेय लंगोटे, सुषमा कुंभार, जयंत ढोके और अजय खामकर शामिल हैं।
इन अधिकारियों के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य के उद्योगों को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी देने की प्रक्रिया में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की गई है।
यह मामला उद्योगों को स्थापना सहमति (Consent to Establish) और संचालन सहमति (Consent to Operate) जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित है। किसी उद्योग को स्थापित करने और उसका संचालन शुरू करने के लिए निर्धारित पर्यावरणीय नियमों के तहत संबंधित मंजूरियां आवश्यक होती हैं। इन अनुमतियों को जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद मामला जांच के दायरे में आया।
जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के कामकाज को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके अलावा, मामले से जुड़े वीडियो साक्ष्य भी सामने आए।
इन शिकायतों और वीडियो क्लिप के आधार पर अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू की गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में वीडियो की सामग्री और उसमें सामने आए तथ्यों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उद्योगों से जुड़े पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन और आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में बोर्ड के अधिकारियों पर लगे आरोपों और उनके निलंबन की कार्रवाई ने प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल, मामले में जांच से जुड़े विस्तृत निष्कर्ष, कथित वित्तीय अनियमितताओं की राशि और अधिकारियों के पक्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।