

पुणे: शहर में बने बस रैपिड ट्रांसपोर्ट स्कीम (BRT) से नागरिकों को सुविधा होने की बजाए परेशानी ही हो रही है। इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। इसलिए लोग इससे नाराज हैं। यही हाल शहर के विधायकों (MLAs) का भी हैं। सभी दलों के विधायकों को भी यह रास नहीं आ रहा। उनका मोहभंग इससे हो गया है। शहर के सभी दलों के विधायकों ने एकसुर में बीआरटी को हटाने की मांग विधानसभा में की।
बीआरटी मार्ग से निजी वाहनों को प्रवेश दिया जाए, ऐसी मांग विधायकों ने पुरजोर तरीके से की। इसपर राज्य सरकार की ओर से उद्योग मंत्री उदय सामंत ने एक कमेटी गठित कर समीक्षा की जाएगी, ऐसा आश्वासन दिया है।
विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान शहर के विधायकों ने पुणे की यातायात समस्याओं, सार्वजनिक परिवहन और बीआरटी के कारण होने वाले व्यवधानों का मुद्दा उठाया। इस चर्चा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक सुनील टिंगरे, विधायक चेतन तुपे, भारतीय जनता पार्टी के विधायक सिद्धार्थ शिरोले, भीमराव तापकीर और दौंड से विधायक राहुल कुल ने सदन में शहर की यातायात समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई की मांग की।
टिंगरे ने कहा कि नगर रोड और विश्रांतवाड़ी रोड पर बीआरटी रूट होने से ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर हो गई है। इससे नागरिकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इसलिए इस मार्ग से बीआरटी को हटाकर ट्रैफिक समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। वहीं, हडपसर-स्वारगेट मार्ग पर बनाया गया साइकिल ट्रैक अब यातायात के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इसलिए इस ट्रैक को हटाकर सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जाए। यह सवाल विधायक चेतन तुपे ने उठाया। विधायक सिद्धार्थ शिरोले ने सुझाव दिया कि निजी यात्री वाहनों को कुछ दिनों के लिए बीआरटी मार्ग पर चलने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि बीआरटी मार्ग पर हर पांच मिनट में बसें नहीं चल रही हैं।
महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा कि बीआरटी का विरोध जरूर हुआ होगा, लेकिन बीआरटी का काम पूरा होने के बाद यह सुचारू रूप से चल रहा था। अगर बीआरटी से नागरिकों को परेशानी हो रही है तो संबंधित एजेंसियों की बैठक कर वहां के ट्रैफिक को कैसे सुचारू किया जाए, इसका पता लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों पर जाम बीआरटी की वजह से नहीं, बल्कि मेट्रो के चल रहे काम की वजह से है। उसके साथ बीआरटी मार्ग को हटाया जाए या निजी वाहनों को बीआरटी मार्ग पर चलने दिया जाए, यह तय करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। वह कमेटी सभी आवश्यक पहलुओं पर विचार कर निर्णय लेगी, ऐसा सामंत ने जवाब में कहा।
पुणे महानगरपालिका ने 2006 में स्वारगेट औऱ कात्रज के बीच बीआरटी योजना की घोषणा की। यह एक प्रायोगिक बीआरटी था। उस समय हमने इस योजना का विरोध किया था, लेकिन नागरिकों के विरोध के बावजुद यह योजना लागू की गई। इस पायलट रूट पर अब तक 110 करोड़ रुपए से ज्यादा की धनराशि खर्च की जा चुकी है। हालांकि अभी तक साइकिल ट्रैक और फुटपाथ का काम पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसकी लागत बहुत हो गई है। इसलिए क्या सरकार इस खर्च की जांच करेगी, ऐसा सवाल विधायक भीमराव तापकीर ने उठाया।