

Siya Goyal Polygraph Test: महाराष्ट्र के चर्चित और हाई-प्रोफाइल केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुणे पुलिस के सामने एक बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस के पास इस बात का थ्योरी और इकबालिया बयान तो है कि रियल एस्टेट कारोबारी केतन की हत्या कैसे और किसने की, लेकिन अदालत में आरोपियों को दोषी साबित करने के लिए कोई पुख्ता डॉक्यूमेंट या चश्मदीद सबूत हाथ नहीं लगा है।
इस गुत्थी को सुलझाने और मामले की तह तक जाने के लिए जांच टीम ने गुरुवार को स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल का 'लाई-डिटेक्टर' (पॉलीग्राफी) टेस्ट कराने की आधिकारिक अनुमति मांगी है।
यह सनसनीखेज मामला 18 जून 2026 को सामने आया था, जब केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले की एक ऊंची चट्टान से 400 फीट गहरी खाई में धकेल कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया गया है, जो 3 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर हैं।
अदालत में दायर याचिका में पुणे पुलिस ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपियों के विरोधाभासी बयानों के अलावा उनके पास ऐसा कोई सीधा चश्मदीद गवाह नहीं है जो यह साबित कर सके कि घटना के वक्त केतन को खाई में असल में किसने धक्का दिया था। इसी कानूनी कमी को दूर करने के लिए पॉलीग्राफी टेस्ट बेहद अहम माना जा रहा है।
जांच के दौरान पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सुराग मिला है। केतन की मौत के बाद उसका मोबाइल फोन काफी देर तक सिया गोयल के पास ही था। पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इस एंगल पर गहनता से तफ्तीश कर रही है कि क्या सिया ने पकड़े जाने के डर से केतन के फोन से उनकी आपसी चैट, कॉल रिकॉर्ड्स या कोई अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा डिलीट किया है।
इससे पहले, 1 जुलाई को पुणे पुलिस की एक विशेष टीम सह-आरोपी चेतन चौधरी को लेकर लोहागढ़ किले के उसी स्पॉट पर गई थी, जहां एक डमी (पुतले) का इस्तेमाल करके पूरे क्राइम सीन को रीक्रिएट किया गया ताकि धक्का देने की सटीक टाइमिंग और एंगल को समझा जा सके।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, पॉलीग्राफी या लाई-डिटेक्टर टेस्ट अक्सर उन्हीं पेचीदा मामलों में अपनाए जाते हैं जहां भौतिक सबूतों की कमी होती है। इस टेस्ट के दौरान आरोपी के रक्तचाप, पल्स रेट और सांस लेने की गति का विश्लेषण किया जाता है जिससे पता चलता है कि वह झूठ बोल रहा है या सच।
हालांकि, भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत इसके नतीजों को अदालत में सीधे तौर पर अकाट्य सबूत नहीं माना जाता, लेकिन जांच एजेंसियों को इससे बेहद महत्वपूर्ण सुराग और नई कड़ियां मिल जाती हैं, जो उन्हें असली सबूतों तक पहुंचाती हैं। फिलहाल, पुलिस सिया के माता-पिता, भाई और केतन के पिता से भी पूछताछ कर चुकी है और अब कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही है।