मुंबई की बारिश पर सियासत गरमाई, दो खेमों में बंटी सत्तारूढ़ भाजपा

मूसलाधार बारिश के कारण प्रभावित हुए मुंबई के जन-जीवन को लेकर महाराष्ट्र की सियासत सोमवार को गरमा गई। इस दौरान एक तरफ विपक्ष सरकार पर सवाल खड़े कर रहा था तो वहीं सत्तारूढ़ महायुति सरकार में शामिल बीजेपी में ही मतभेद देखने को मिला। बीजेपी विधायक आशीष शेलार ने मुंबई के हालत को ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराया, तो वहीं अजीत पवार व सुधीर मुनगंटीवार मनपा का बचाव किया है।
Politics over Mumbai Rain
मुंबई में भारी बारिश (फोटो: पीटीआई)
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मुंबई. मूसलाधार बारिश के कारण प्रभावित हुए मुंबई के जन-जीवन को लेकर महाराष्ट्र की सियासत सोमवार को गरमा गई। इस दौरान एक तरफ विपक्ष सरकार पर सवाल खड़े कर रहा था तो वहीं सत्तारूढ़ महायुति सरकार में शामिल बीजेपी में ही मतभेद देखने को मिले। विधान मंडल के मानसून सत्र के दौरान बीजेपी विधायक आशीष शेलार ने मुंबई में नाला सफाई पर श्वेत जारी करने की मांग कर दी तो वहीं राज्य के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार व वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने ये कहकर मनपा का बचाव किया है।

मुंबईकरों का मानसून के इस सीजन में 'अच्छी बारिश' का इंतजार सोमवार को समाप्त हुआ। रविवार-सोमवार की रात मुंबई में बादल जमकर बरसे। मुंबई में 6 घंटों में हुई 300 मिलीमीटर बारिश के कारण कई इलाकों में पानी भर गया। जिसके परिणाम स्वरूप पटरियों पर पानी भरने से ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ तो वहीं जलजमाव के कारण सड़कों पर जाम की स्थिति देखने को मिली। नतीजतन मुंबई मनपा राजनीतिज्ञों के निशाने पर आ गई।

जन प्रतिनिधि चुनाव कार्य में थे व्यस्त

सत्तारूढ़ महायुति सरकार में शामिल बीजेपी विधायक व मुंबई प्रदेश अध्यक्ष आशीष शेलार ने महाराष्ट्र विधान मंडल के मानसून सत्र के दौरान नाला सफाई का मुद्दा विधानसभा में उठाया। शेलार ने कहा कि मानसून से पहले नालों की सफाई के दौरान सब जन प्रतिनिधि चुनाव कार्य में लगे थे। उस दौरान मनपा अधिकारियों की लापरवाही के कारण ठेकेदारों ने मुंबई के बड़े-बड़े नालों की सफाई ठीक नहीं किया, नाले से गाद पूरी तरह नहीं हटाई गई। नालों से निकाला गया कीचड़ उठाया नहीं गया। हमने यह मामला मनपा अधिकारियों के संज्ञान में लाया था। फिर भी काम नहीं हुए। कीचड़ फिर से नालों में चली गई। इसलिए मुंबई के नालों की सफाई पर श्वेत पत्र निकाले।

महायुति सरकार प्रतिशत और कमीशन में फंसी

विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार की आलोचना करते हुए कहा, "मुंबई के खजाने को लूटने वाले डकैतों के कारण ऐसे हालात हुए हैं। यदि 300 मिमी में यही स्थिति है तो क्या होगा? कई काम बाकी थे। वे काम नहीं कर सके। सरकार प्रतिशत और कमीशन में फंसी है। मुंबई की स्थिति के लिए बीएमसी और सरकार जिम्मेदार हैं। अब सरकार की वापसी यात्रा शुरू हो गई है। सरकार प्रबंधन नहीं कर पा रही है।"

पहली ही भारी बारिश में मुंबई में हाहाकार

कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा, "पहली ही भारी बारिश में मुंबई में हाहाकार मच गया है। मुंबई के कई हिस्सों में पानी भर गया है। मुंबई में प्री-मानसून काम पूरा होने के बीएमसी और राज्य सरकार के दावे पहली ही बारिश में बह गए। महायुति सरकार झूठी है और नालों की सफाई और प्री-मानसून कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और ढिलाई ने मुंबईकरों को भारी पीड़ा दी है।"

चुल्लू भर पानी में मुंबई को डुबो दिया

वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पाटोले महायुति सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "महाभ्रष्ट युतीने 'चुल्लू भर पानी में मुंबई को डुबो दिया'! मुंबई बीएमसी मुख्यमंत्री मातहत काम कर रही है, लेकिन राज्य की बागडोर गलत व्यक्ति के हाथ में है, इसलिए इसका खामियाजा मुंबई और महाराष्ट्र को भुगतना पड़ रहा है। क्या मनपा कार्यालय में दो पालक मंत्रियों को मुंबईकरों की मेहनत की कमाई खाने के लिए बैठाया गया है?

BMC को क्लीन चिट नहीं

सुधीर मुनगंटीवार ने बीएमसी का बचाव करते हुए कहा, "मैं नगर पालिका को क्लीन चिट नहीं दे रहा हूं, लेकिन शहर जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उन्हें हल करने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनानी होंगी। सरकार मुंबई के लिए 17 हजार करोड़ रुपए की योजनाएं लेकर आई है। उससे हम मुंबई को सभी समस्याओं से मुक्त करने जा रहे हैं। लेकिन, जब अचानक ऐसी चीजें होती हैं तो ऐसे सवाल उठते हैं। इसलिए मैं मुंबई मनपा को दोष नहीं देता। दुबई और न्यूयॉर्क में प्रशासन बेहतरीन काम करता है, लेकिन वहां भी पानी भरता है।"

मुंबई को ग्लोबल वार्मिंग का खामियाजा भुगतना पड़ा

उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, "मुंबई में पूरे साल में जितनी बारिश होती है उसका 10 प्रतिशत पानी बीती रात 6 घंटों में हुई। भारत और दुनिया के दूसरे शहरों की तरह, मुंबई को भी जलवायु परिवर्तन (ग्लोबल वार्मिंग) का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हमें जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में होने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुंबई और महाराष्ट्र में बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा।"

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