NEET धांधली के खिलाफ NSUI का प्रदर्शन, वर्धा में हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरकार को दिया अल्टीमेटम

NSUI Wardha: NEET परीक्षा धांधली और शिक्षा में अव्यवस्था के खिलाफ NSUI ने वर्धा में विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया। प्रदेश महासचिव उत्कर्ष पांडे के नेतृत्व में छात्रों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया।
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वर्धा में NSUI की मुहिम की फोटो (सोर्स: नवभारत फोटो)
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NSUI Wardha Signature Campaign: देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था और NEET जैसी परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ छात्रों का आक्रोश अब शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी विरोध की लहर अब महाराष्ट्र के जिलों में भी प्रचंड रूप धारण कर चुकी है। शनिवार, 25 जुलाई 2026 को वर्धा जिले में NSUI के प्रदेश महासचिव उत्कर्ष पांडे के नेतृत्व में छात्रों की गूंज हस्ताक्षर अभियान का सफल आयोजन किया गया, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

वर्धा के विभिन्न महाविद्यालयों और प्रमुख शैक्षणिक स्थलों पर आयोजित इस वृहद अभियान में सैकड़ों छात्रों ने हिस्सा लिया। छात्रों ने न केवल कागजों पर अपने हस्ताक्षर किए, बल्कि वर्तमान सरकार की छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध भी दर्ज कराया। अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक और शैक्षणिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था, ताकि वे अपनी भविष्य की लड़ाई खुद लड़ सकें।

यह केवल आक्रोश नहीं, देश के भविष्य पर आघात है

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन प्रदेश महासचिव उत्कर्ष पांडे ने सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में फैली अव्यवस्था से छात्रों के भीतर जो निराशा है, वह महज एक भावना नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने ने जोर देकर कहा, युवाओं की आवाज को अब दबाया नहीं जा सकता, छात्रों की गूंज अब देश के हर शैक्षणिक संस्थान में सुनाई देगी। उनका मानना है कि सरकार की वर्तमान नीतियां देश के उज्ज्वल भविष्य पर गहरा आघात कर रही हैं।

केवल इस्तीफे से बात नहीं बनेगी

वर्धा में उमड़ा यह जनसैलाब हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और विपक्ष की बढ़ती सक्रियता से भी प्रेरित नजर आया। जैसा कि सांसद सुप्रिया सुले ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह इस्तीफा केवल शांतपूर्ण प्रदर्शनकारियों और छात्रों के निरंतर दबाव का परिणाम है, लेकिन यह लड़ाई का अंत नहीं है। सुले की तर्ज पर वर्धा के छात्रों ने भी वास्तविक जवाबदेही और व्यापक शैक्षिक सुधारों की मांग की है।

आंदोलनकारियों के बीच अभिजीत दीपके जैसे युवाओं के संघर्ष की चर्चा भी जोरों पर रही, जिन्होंने 28 दिनों तक जंतर-मंतर पर अपनी सेहत की परवाह किए बिना लड़ाई लड़ी और जिनके परिवार ने उनके लिए कई रातें जागकर बिताईं।

संगठन की एकजुटता

इस सफल हस्ताक्षर अभियान में उत्कर्ष पांडे के साथ मुख्य रूप से कृष वैरागड़े, प्रज्ञा वैरागड़े, शिवम मांडवकर, हुमराज रावंडाले और गौरव जैसे युवा पदाधिकारियों ने कमान संभाली। कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या और छात्रों का भारी समर्थन यह साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में छात्र आंदोलन और भी उग्र हो सकता है।

वर्धा से उठी यह छात्रों की गूंज इस बात का प्रमाण है कि देश का युवा अब अपने हक के लिए खामोश नहीं बैठेगा। हस्ताक्षरों के माध्यम से दर्ज कराया गया यह विरोध सरकार के लिए एक बड़ा अल्टीमेटम है।

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