Nashik: देवनागरी से रोमन तक, Urja Bal Mahotsav के दूसरे दिन कला का उत्सव, कैलीग्राफी बनी आकर्षण

Nashik Urja Children's Festival : ऊर्जा बाल महोत्सव के दूसरे दिन कला व मनोरंजन का सुंदर संगम। प्रसिद्ध कैलीग्राफीकार के मार्गदर्शन में बच्चों व अभिभावकों ने रचनात्मक कैलीग्राफी वर्कशॉप में भाग लिया।
Urja Bal Mahotsav के दूसरे दिन कला का उत्सव, कैलीग्राफी बनी आकर्षण
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Urja Bal Mahotsav Hindi News: आधुनिक तकनीक के युग में हस्तकला और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित 'ऊर्जा बाल महोत्सव' में दूसरे दिन कला और मनोरंजन का अद्वितीय संगम देखने को मिला।

बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों ने भी इन रचनात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। महोत्सव की शुरुआत प्रसिद्ध कैलीग्राफीकार नीलेश और पूजा गायधनी के मार्गदर्शन में आयोजित कैलीग्राफी वर्कशॉप से हुई।

इस कार्यशाला में बच्चों और अभिभावकों ने भाग लिया और अक्षरों की सुंदरता और अभिव्यक्ति की कला का अनुभव किया। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने देवनागरी और रोमन कैलीग्राफी, स्ट्रोक तकनीक, ब्रश पेन का उपयोग, अक्षरों में संतुलन, स्पेसिंग, और क्रिएटिव लेटरिंग का प्रदर्शन किया गया।

एडवेंचर पार्क को देखकर खुश हुए बच्चे

प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष अभ्यास करके सीखा कि अक्षरों को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए किन बातों पर ध्यान देना चाहिए। प्रसिद्ध संगीतकार, लेखक और गायक डॉ। सलील कुलकर्णी का 'मधली सुट्टी' कार्यक्रम बच्चों और अभिभावकों के लिए एक बड़ी दावत साबित हुआ। एस्पिलियर स्कूल के बच्चों ने सलील कुलकर्णी के साथ प्रार्थना गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। कुलकर्णी ने स्मृति उद्यान में एडवेंचर पार्क देखकर अपनी खुशी व्यक्त की और नाशिक के लोगों से अपने बच्चों के साथ इस बाल महोत्सव में अवश्य शामिल होने का आग्रह किया।

आदिवासी परंपरा को बचाए रखने शिविर

दूसरे दिन की शुरुआत संजय देवधर द्वारा संचालित वारली पेंटिंग वर्कशॉप से हुई। पारंपरिक आदिवासी कला की विरासत को संरक्षित करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

कार्यशाला में बच्चों, युवाओं और कला प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सहभागी कलाकारों को वारली कला का इतिहास, विशेषताएं और प्रत्यक्ष चित्रांकन की तकनीक सिखाई गई।

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सरल रेखाओं, प्राकृतिक रंग योजनाओं और ग्रामीण जीवन को दर्शाने वाले वारली चित्रों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार सत्यजीत पाध्ये का 'बोलके बाहुले' (बोलने वाली कठपुतलियां) मनोरंजक कार्यक्रम था, जो बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

कठपुतलियों के माध्यम से दिया संदेश

छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी दर्शकों ने इस कार्यक्रम को जोरदार प्रतिक्रिया दी। पाध्ये ने विभिन्न कठपुतलियों के माध्यम से कॉमेडी, सामाजिक संदेश और मनोरंजक संवाद प्रस्तुत किए। उनकी आवाज का उतार-चढ़ाव, कठपुतलियों की जीवंत हरकतें और हास्यपूर्ण संवादों से पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। महोत्सव में 'श्री इडियट्स' फिल्म के फुनसुख वांगडू के 100 से अधिक विज्ञान प्रयोग।

बिजली बचत को लेकर किया जागरूक

बिजली की बचत समय की जरूरत बन गई है। मांग से कम आपूर्ति होने के कारण नागरिकों को लोडशेडिंग का सामना करना पड़ रहा है। घर के बिजली उपकरणों के उपयोग पर नियंत्रण रखकर बिजली के बिल में की गई बचत, बच्चों द्वारा ऊर्जा बचत में दिया गया छोटा योगदान ही कहा जाएगा। ऊर्जा बचत की जनजागरूकता के लिए चलाया गया यह अभियान सराहना के पात्र है।

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