पॉश एक्ट का जीरो अनुपालन, एनसीडब्ल्यू टीम ने टीसीएस की नासिक इकाई में गंभीर खामियों का खुलासा किया

TCS Nashik Case: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। पॉश समिति की विफलता, जबरन धर्मांतरण के प्रयास और आरोपियों के 'ऑफिस कंट्रोल' पर रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी।
Zero Compliance with POSH Act: NCW Team Uncovers Serious Lapses at TCS's Nashik Unit
TCS व राष्ट्रीय महिला आयोग का लोगो (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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TCS Nashik POSH Act Violation: टीसीएस (TCS) की नासिक इकाई में हुए यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट ने कंपनी के भीतर महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निवारण (POSH) समिति की विफलता को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आयोग ने पाया कि नासिक इकाई में न केवल पॉश अधिनियम का उल्लंघन हो रहा था, बल्कि वहां का माहौल महिलाओं के लिए अत्यंत दमनकारी और असुरक्षित बना दिया गया था।

पॉश समिति की भारी लापरवाही

नासिक स्थित आईटी फर्म में महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के दावों की जांच करने वाली चार सदस्यीय एनसीडब्ल्यू फैक्ट फाइंडिंग टीम को कई उल्लंघनों का पता चला, जिन्हें देखकर टीम के सदस्य भी असंवेदनशीलता के स्तर से स्तब्ध रह गए। विशेष रूप से पॉश समिति कई मामलों में विफल पाई गई है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने अपनी जांच में पाया कि पॉश के लिए आंतरिक समिति (आईसी) पुणे और नासिक दोनों के लिए एक ही है जो अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। पॉश अधिनियम के अनुपालन की जांच के लिए आईसी के किसी भी सदस्य ने नासिक इकाई का दौरा या निरीक्षण नहीं किया। एनसीडब्ल्यू ने आगे कहा कि पॉश अनुपालन के अनिवार्य होने को दर्शाने वाले कोई प्लेकार्ड, बोर्ड या पोस्टर नहीं थे, न ही आईसी समिति के सदस्यों या उनके संपर्क विवरण प्रदर्शित करने वाला कोई बोर्ड था।

पॉश समिति की असंवेदनशीलता

एनसीडब्ल्यू ने अपनी जांच में पाया कि कर्मचारियों के लिए कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं थे और आईसी सदस्यों के लिए कोई ओरिएंटेशन कार्यक्रम नहीं थे। संक्षेप में, पॉश अधिनियम का बिल्कुल भी अनुपालन नहीं हुआ। एनसीडब्ल्यू का कहना है कि पॉश समिति के सदस्यों द्वारा दिखाई गई असंवेदनशीलता से समिति स्तब्ध थी। वे पॉश अधिनियम की धारा 19(सी) के अनिवार्य अनुपालन में पूरी तरह विफल रहे। टीसीएस नासिक की महिला कर्मचारियों के प्रति कोई सहानुभूति या हमदर्दी नहीं दिखाई गई। गौरतलब है कि नासिक स्थित टीसीएस इकाई में महिला कर्मचारियों के जबरन धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके कुछ ही दिनों बाद, राष्ट्रीय राष्ट्रीय कल्याण संगठन (एनसीडब्ल्यू) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कई महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए अपनी टीम नासिक भेजी।

अवैध कंट्रोल और दमनकारी माहौल

एनसीडब्ल्यू ने अपनी दो-पृष्ठीय रिपोर्ट में नासिक स्थित कंपनी की अनियमितताओं और उदासीनता के कई उदाहरण दर्ज किए हैं, जिससे यह तथ्य पुष्ट होता है कि कई महिला कर्मचारी चुपचाप उत्पीड़न सहती रहीं और दूसरे धर्मों के पुरुष सहकर्मियों द्वारा किए गए उत्पीड़न के बारे में बोलने से डरती थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपियों ने आईटी कंपनी के कार्यालय पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था और वे युवा और कमजोर लड़कियों को निशाना बनाते थे। रिपोर्ट में शिकायतों को भी सही पाया गया है, जिसमें कहा गया है कि वास्तव में आरोपियों द्वारा उनका उत्पीड़न और यौन शोषण किया गया था।

धर्मांतरण के लिए मानसिक यातना

रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी हिंदू पौराणिक कथाओं, मान्यताओं और परंपराओं का अपमान करके और लड़कियों को यह कहकर धमकाते थे कि इस्लाम हिंदू धर्म से श्रेष्ठ है। आरोपी हिंदू धर्म को नीचा दिखाते थे और बार-बार धर्मविरोधी टिप्पणियां करके एक दमनकारी माहौल बनाते थे। यह महिला कर्मचारियों के इस दावे की भी पुष्टि करता है कि वे मुख्य रूप से दो कारणों से शिकायत दर्ज कराने से डरती थीं  पहला, सामाजिक कलंक का डर और दूसरा, कंपनी में पूर्ण शिकायत निवारण तंत्र का अभाव।

अमानवीय प्रथाओं की गहराई से जांच करने पर टीम ने पाया कि टीसीएस नासिक केंद्र आरोपी दानिश, तौसीफ और रजा मेनन के कंट्रोल में था, और उन्हें अश्विनी चैनानी का संरक्षण प्राप्त था। आवाज उठाने वाले किसी भी कर्मचारी को पेशेवर प्रतिशोध का सामना करना पड़ता था, जबकि मानव संसाधन विभाग पूरी तरह से चुप्पी साधे रहता था और शिकायत की परेशानियों से अनभिज्ञ बना रहता था।

आयोग की सिफारिशें

महिला पैनल ने यह भी सिफारिश की है कि संबंधित अधिकारी और टीसीएस प्रबंधन इस मामले में उचित कार्रवाई करें और कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, गरिमा और संरक्षा के लिए वैधानिक सुरक्षा उपायों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।

(IANS एजेंसी इनपुट के साथ)

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