Nashik-Pune Railway सीधे मार्ग को बरकरार रखने की मांग तेज, एक्शन कमिटी ने मुख्यमंत्री संग बैठक पर टिकाई नजर

Nashik Pune Railway: नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेलवे के सीधे मार्ग को बदलने के विरोध में सिन्नर एक्शन कमिटी ने आंदोलन की चेतावनी दी है। अब अगली दिशा मुख्यमंत्री संग बैठक से तय होगी।
Sinnar Action Committee demands execution of the original Nashik-Pune rail route. Future course of the protest now depends on the upcoming meeting with the CM.
रेलवे परियोजना (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Nashik Pune Railway Project Chief Minister Meeting: नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेलवे परियोजना के प्रस्तावित 'सीधे मार्ग' को बरकरार रखने की मांग ने तूल पकड़ लिया है। सिन्नर तहसील रेलवे एक्शन कमिटी ने स्पष्ट कर दिया है कि सिन्नर-संगमनेर-आलेफाटा-नारायणगांव-मंचर-खेड-चाकण मार्ग पर ही परियोजना का क्रियान्वयन होना चाहिए। इस मांग को लेकर प्रशासन के साथ हुई बैठकों के बाद अब आंदोलन की अगली दिशा मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित चर्चा पर निर्भर करेगी।

बैठकों का दौर और प्रशासन का रुख

बुधवार को सिन्नर तहसील कार्यालय में प्रांताधिकारी शशिकांत मंगरुले और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एक्शन कमिटी ने अपनी बात मजबूती से रखी। इसके बाद नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित विशेष बैठक में कमिटी ने अपनी दलीलें पेश कीं। कमिटी के पदाधिकारियों का मानना है कि यदि मूल (सीधे) मार्ग से छेड़छाड़ की गई, तो उत्तर महाराष्ट्र, अहिल्यानगर और पुणे जिले के लाखों नागरिकों को विकास के लाभ से वंचित होना पड़ेगा। यह मार्ग औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने एक्शन कमिटी की मागों को रेलवे विभाग के मुख्य अभियंता और राजस्व आयुक्त प्रवीण गेडाम के माध्यम से राज्य सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का भरोसा दिया है। प्रशासन द्वारा आंदोलन वापस लेने के आग्रह के बावजूद, एक्शन कमिटी ने झुकने से इनकार कर दिया है। कमिटी ने कहा है कि उनकी मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। 29 जून को गोंदे फाटा पर प्रस्तावित 'रास्ता रोको' - आंदोलन के बारे में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा।

एक्शन कमिटी के प्रमुख प्रतिनिधि

बैठक में बबन वाजे, हरिभाऊ तांबे, भाऊसाहेब शिंदे, -प्रो. राजाराम मुंगसे, मुकेश देशमुख और अरविंद देशमुख सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में औद्योगिक और प्रादेशिक विकास के लिए इस सीधे मार्ग की वकालत की। एक्शन कमिटी  ने संकल्प दोहराया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका यह जनसंघर्ष जारी रहेगा।

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