नासिक म्हाडा घोटाला-2.0 का पर्दाफाश, 20% आरक्षित जमीन हड़पने के मामले में विकासकों पर FIR दर्ज

Nashik MHADA 2.0 Pathardi Land Fraud FIR: पाथर्डी में 24,800 वर्ग मीटर जमीन के कथित बंटवारे और म्हाडा आरक्षण नियम से बचने के आरोप में इंदिरानगर पुलिस ने विकासकों सहित अन्य लोगों पर मामला दर्ज किया।
Nashik MHADA Scam Pathardi Land Fraud Indiranagar Police
नासिक MHADA 2.0 पाथर्डी लैंड फ्रॉड FIRसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • पाथर्डी क्षेत्र में कथित जमीन घोटाले को लेकर इंदिरानगर पुलिस थाने में मामला दर्ज।

  • 24,800 वर्ग मीटर के दो भूखंडों को छोटे हिस्सों में दिखाने का आरोप।

  • म्हाडा के लिए 20% जमीन आरक्षित रखने के नियम से बचने की आशंका।

  • खुली जगह के प्रावधान और राजस्व दस्तावेजों में कथित हेराफेरी पर सवाल।

  • विकासकों के साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

Nashik MHADA Scam Pathardi Land Fraud Indiranagar Police: नासिक के पाथर्डी क्षेत्र में म्हाडा के लिए आरक्षित जमीन और खुली जगह के नियमों से कथित तौर पर बचने के लिए भूखंडों को छोटे हिस्सों में दिखाने का मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र युवराज पाटील की शिकायत पर इंदिरानगर पुलिस ने सिद्धार्थ काबरा, भारती काबरा, अरुणप्रकाश आगीवाल सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जमीन के दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी की जांच की जा रही है।

पाथर्डी में म्हाडा घोटाला-2.0 का मामला

नासिक, मार्च 2025 में चर्चित म्हाडा घोटाले के बाद अब नासिक के पाथर्डी क्षेत्र में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकार, म्हाडा और आम नागरिकों के साथ धोखाधड़ी की गई तथा म्हाडा के लिए आरक्षित रखी जाने वाली 20 प्रतिशत जमीन के नियम से बचने का प्रयास किया गया।

सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र युवराज पाटील की शिकायत के आधार पर इंदिरानगर पुलिस थाने में सिद्धार्थ ओमप्रकाश काबरा, भारती ओमप्रकाश काबरा, अरुणप्रकाश पंढरीनाथ आगीवाल सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी।

24,800 वर्ग मीटर जमीन के बंटवारे पर सवाल

शिकायत के अनुसार, पाथर्डी क्षेत्र के सर्वे नंबर 17/2/अ और 17/2/ब में दो भूखंड हैं। प्रत्येक का क्षेत्रफल 12,400 वर्ग मीटर बताया गया है। इस तरह दोनों भूखंडों का कुल क्षेत्रफल 24,800 वर्ग मीटर होता है।

शिकायत में कहा गया है कि संबंधित जमीन आवासीय क्षेत्र में आती है। एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन नियमावली के अनुसार, 4,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले ले-आउट में म्हाडा के लिए 20 प्रतिशत जमीन आरक्षित रखने का प्रावधान लागू होने की बात कही गई है।

आरोप है कि इस नियम से बचने के लिए बड़े भूखंडों को कृत्रिम रूप से छोटे हिस्सों में बांटकर दर्शाया गया। शिकायत के मुताबिक, 12,400 वर्ग मीटर के भूखंडों को 3,100 से 4,658 वर्ग मीटर तक के अलग-अलग हिस्सों के रूप में दिखाया गया। इससे आरक्षित जमीन के नियम के पालन पर सवाल उठे हैं।

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खुली जगह के नियम में भी कथित हेराफेरी

शिकायत में केवल नासिक म्हाडा के लिए आरक्षित जमीन ही नहीं, बल्कि खुली जगह के प्रावधान को लेकर भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि नियमों के तहत 10 प्रतिशत खुली जगह छोड़ने की अनिवार्यता से बचने के लिए भूखंडों का क्षेत्रफल 0.4 हेक्टेयर से कम दर्शाया गया।

शिकायतकर्ता का दावा है कि सरकारी दर से प्रीमियम का भुगतान कर खुली जगह संबंधी प्रावधान को कागजों पर ही समाप्त करने का प्रयास किया गया। इससे नियोजित शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

23 साल बाद दस्तावेजों में बदलाव का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि करीब 23 साल बाद माप नक्शों, हिस्सा फॉर्म नंबर 4 और हिस्सा फॉर्म नंबर 12 के आधार पर जमीन के अलग-अलग उपखंड तैयार किए गए। इसके लिए तत्कालीन नायब तहसीलदार के पत्र का आधार दिखाकर तलाठी के माध्यम से स्वतंत्र उपखंड बनाने और अलग-अलग सातबारा उतारे तैयार करवाने की बात कही गई है।

इन प्रक्रियाओं के जरिए राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से बड़े बदलाव किए जाने का संदेह जताया गया है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में संगठित गिरोह की भूमिका की आशंका भी व्यक्त की है।

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नगर रचना विभाग की भूमिका पर भी सवाल

मामले की जांच का दायरा जमीन मालिकों और विकासकों तक सीमित रहेगा या संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका तक पहुंचेगा, यह जांच के आगे बढ़ने पर स्पष्ट होगा। शिकायत में ले-आउट मंजूरी, माप नक्शे, राजस्व अभिलेखों में बदलाव और नगर रचना संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

नगर रचना विभाग के कुछ अभियंताओं और अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग भी सामने आई है। फिलहाल, आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।

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