नासिक के बांधों में 27.11% जलसंग्रह, गंगापुर समूह मजबूत; सिंहस्थ कुंभ के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध

Nashik Dams Water Level: नासिक जिले के बांधों में प्री-मानसून बारिश से जलस्तर सुधरा है। गंगापुर समूह मजबूत स्थिति में होने से आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान पानी की किल्लत नहीं होगी।
Pre-monsoon rains have improved water levels in Nashik dams. With Gangapur group in a stable position, no water scarcity is expected during the upcoming Kumbh Mela.
पानी की किल्लत (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Dams Water Level Pre Monsoon Rain: मई के अंत और जून की शुरुआत में हुई प्री-मानसून बारिश से नासिक जिले के बांधों के जलस्तर में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। वर्तमान में जिले के बांधों में कुल जलसंग्रह 27.11 प्रतिशत है। हालांकि यह आंकड़ा सीमित लग सकता है, लेकिन नासिक शहर को जलापूर्ति करने वाले प्रमुख बांध समूह मजबूत स्थिति में हैं, जिससे सिंहस्थ कुंभमेले के दौरान पानी की किल्लत की संभावना न के बराबर है।

गंगापुर बांध समूह की स्थिति मजबूत

नासिक शहर की जीवनदायिनी कहे जाने वाले गंगापुर बांध समूह का जलस्तर काफी संतोषजनक है। इस समूह में चार प्रमुख बांध शामिल हैं

  • गौतमी गोदावरीः यह बांध इस समूह में सबसे अधिक 75.70 प्रतिशत भरा हुआ है।
  • गंगापुर, कश्यपी और आलंदीः इन बांधों सहित पूरे समूह की कुल क्षमता 43.15 प्रतिशत है, जो शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है।

लोगों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा

जल संसाधन विभाग ने भरोसा जताया है कि वर्तमान स्टॉक भले ही सीमित हो, लेकिन आगामी मानसून सीजन में स्थिति तेजी से सुधरेगी। यदि जून से सितंबर के दौरान सामान्य बारिश होती है, तो जिले के अधिकांश जलाशय पूरी तरह भर जाएंगे, वर्तमान स्थिति और मानसून की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन आश्वस्त है कि सिंहस्थ कुंभ मेले के समय श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

जिले के बांधों का वर्तमान जलसंग्रह

3 जून के आंकड़ों के अनुसार जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 26 बांधों में कुल 19148 मिलियन क्यूबिक फीट उपयोगी पानी उपलब्ध है

  • गिरणा समूहः 31.68 प्रतिशत जलसंग्रह के साथ यह समूह बेहतर स्थिति में है।
  • दारणा समूहः 21. 75 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध है। पालखेड समूहः 14.05 प्रतिशत जलसंग्रह शेष है। वाघाड बांध (1.74%) और पुणेगांव (2.89%) का जलस्तर काफी कम हो गया है, जबकि मुकणे समूह का हरणबारी बांध पूरी तरह सूख चुका है।
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