मुझे दे दो ये मर्सिडीज कार नहीं तो हो जाएगी तुम्हारी मौत, ईडी ने जब्त की खरात की कार, खुला '9' नंबर का रहस्य

Ashok Kharat Case: ईडी ने जब्त की अशोक खरात की 90 लाख की मर्सिडीज। व्यवसायी को मौत का डर दिखाकर की थी वसूली। अंक ज्योतिष के मोह का भी खुलासा।
Ashok Kharat Mercedes Seized ED
Ashok Kharat Mercedes Seized ED (डिजाइन फोटो)
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Ashok Kharat Mercedes Seized ED: नासिक के स्वयंभू 'गॉडमैन' और ठग अशोक खरात के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कसता जा रहा है। यौन शोषण और धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस कार्रवाई के बाद, अब ईडी ने खरात की अवैध संपत्तियों पर बड़ा प्रहार किया है। सोमवार को दिन भर चली सघन जांच के बाद, ईडी ने खरात की 90 लाख रुपये की लग्जरी मर्सिडीज कार को जब्त कर लिया है।

यह जब्ती न केवल खरात की विलासिता को उजागर करती है, बल्कि उस खौफनाक तरीके को भी बयां करती है जिससे वह लोगों को ठगता था।

'अवतार पूजा' और मौत की धमकी

जांच में सामने आया है कि यह आलीशान कार खरात ने पुणे के एक निर्माण व्यवसायी, राजेंद्र जासूद को डरा-धमकार हासिल की थी। जासूद अपने लॉजिस्टिक्स व्यवसाय में सफलता की तलाश में खरात के पास आए थे। खरात ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उन्हें 'मृत्यु का भय' दिखाया। खरात ने धमकी दी थी कि, "अगर मुझे अवतार पूजा के लिए मर्सिडीज कार नहीं दी, तो तुम मर जाओगे।" मौत के डर से जासूद ने अगस्त 2018 में 15 लाख रुपये का डाउन पेमेंट और 75 लाख का लोन लेकर यह कार खरात को सौंप दी।

अंक ज्योतिष और '9' का अंधविश्वास

अशोक खरात अंधविश्वास और अंक ज्योतिष (Numerology) का कट्टर अनुयायी था। उसने जानबूझकर इस कार की डिलीवरी नासिक (MH 15) से कराई और भारी अतिरिक्त शुल्क चुकाकर VIP नंबर 8181 लिया। इस नंबर का कुल योग '9' (8+1+8+1=18, 1+8=9) आता है, जिसे वह अपने लिए बेहद शुभ मानता था। ईडी को खरात के परिसर में एक अन्य गाड़ी (नंबर 6453) भी मिली है, जिसका योग भी 9 ही आता है। यह दर्शाता है कि ठगी की रकम को वह अपने अंधविश्वासों और भव्य जीवनशैली पर खर्च कर रहा था।

अन्य बड़े नामों के फंसने की आशंका

ईडी अब खरात की अन्य बेनामी संपत्तियों और निवेशों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों को अंदेशा है कि राजेंद्र जासूद की तरह ही कई अन्य बड़े व्यवसायी और रसूखदार लोग खरात के 'आध्यात्मिक जाल' में फंसकर अपनी संपत्ति गँवा चुके हैं। सोमवार की छापेमारी के बाद अब यह जांचने की कोशिश की जा रही है कि ठगी का यह पैसा किन-किन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स या शेल कंपनियों में डायवर्ट किया गया है।

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