नासिक धर्मांतरण मामला: मीडिया ट्रायल से न्याय प्रभावित, ओवैसी ने कहा- अदालत से पहले दोषी ठहराना गलत

Nashik Conversion Case: नासिक कथित धर्मांतरण मामले पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बिना ठोस सबूत मीडिया ट्रायल गलत है। अदालत का फैसला आने तक संयम जरूरी है।
Nashik Conversion Case: Justice Compromised by Media Trial; Owaisi States—Convicting Someone Before the Court Is Wrong
असदुद्दीन ओवैसी, नासिक धर्मांतरण मामला,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Conversion Case Asaduddin Owaisi: छत्रपति संभाजीनगर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नासिक के कथित धर्मातरण मामले को राजनीतिक रंग देकर मीडिया के जरिए आरोपी को पहले ही दोषी साबित करने की कोशिश की जा रही है। अदालत में अभी तक कोई ठोस सबूत साबित नहीं हुआ है। ऐसे में मीडिया ट्रायल अन्यायपूर्ण है व इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। किसी भी मामले का अंतिम निर्णय अदालत ही करती है व तब तक संयम रखना जरूरी है।

मतीन अदालत में रखेंगे अपना पक्ष

राज्य में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को गति देने के लिए एमआईएम ने मोबाइल एप तैयार किया है। इससे जुड़ी विशेष बैठक शनिवार को हज हाउस में आयोजित की गई, जिसमें मार्गदर्शन करने आए ओवैसी पत्रकारों से रू-ब-रू हुए। नासिक के टीसीएस से जुड़े कथित धर्मातरण व यौन शोषण मामले में नारेगांव स्थित कैसर कॉलोनी से निदा खान की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि इसे पार्टी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, अदालत से निदा को राहत मिलने का विश्वास भी उन्होंने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के नेता की शिकायत पर यह कार्रवाई किए जाने से प्रकरण पर सवाल खड़े होते हैं। नगरसेवक मतीन पटेल पर निदा खान को शरण देने के आरोप पर ओवेसी ने कहा कि इसमें परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। मतीन अपना पक्ष अदालत में रखेंगे व कानून अपना काम करेगा।

अब तक 9 मामले हो चुके दर्ज, जिसमें एक धार्मिक भी

निदा खान मामले में औवेसी ने कहा कि अब तक कुल 9 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें एक धार्मिक भावनाएं आहत करने का भी है। संबंधित युवती का पहले ही तबादला हो चुका था व घटना के समय उसका संबंधित कंपनी से सीधा संबंध नहीं था। कंपनी के आधिकारिक बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निदा मानव संसाधन विभाग में कार्यरत नहीं थीं व उनकी भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवाल तथ्यहीन हैं।

घर में बुरका मिलना कब से हो गया अपराध ?

ओवैसी ने कहा कि एफआईआर में निदा के घर से बुरका, नकाब व धार्मिक किताबें जब्त होने का जिक्र है। उन्होंने सवाल किया कि ये चीजें आखिर कब से आपत्तिजनक मानी जाने लगीं। दिल्ली व इलाहाबाद के पुराने मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि साहित्य व धार्मिक सामग्री के आधार पर गिरफ्तार लोगों को बाद में अदालत से राहत मिली थी।

शिक्षित मुस्लिम युवक-युवतियों को बनाया जा रहा निशाना

ओवैसी ने आरोप लगाया कि शिक्षित मुस्लिम युवक-युवतियों को निशाना बनाने के लिए नासिक के प्रकरण को तूल दिया जा रहा है। कानून की प्रक्रिया स्वतंत्र है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इस मामले में भी अदालत निष्पक्ष फैसला देगी।

असदुद्दीन ओवैसी ने मुंबई ट्रेन व मालेगांव बम विस्फोट का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई थी। गिरफ्तारी पर काफी चर्चा हुई, पर अदालत के फैसले आने के बाद मामला शांत हो गया, उन्होंने पूछा कि इन विस्फोटों को अंजाम किसने दिया व जिन लोगों की जान गई, क्या उनके परिवारों को इंसाफ मिला?

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