

Prithviraj Chavan On Nashik Smart City Budget: पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 2014 में महाराष्ट्र में सत्ता में रही कांग्रेस-राकांपा सरकार के दौरान घोषित योजनाओं और बजट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने 35 हजार करोड़ रुपये के बजट और उस समय घोषित किए गए विकास कार्यों के आंकड़ों पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि कई घोषणाओं के पीछे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तक तैयार नहीं थी। चव्हाण ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने बड़े पैमाने पर बजट और विकास योजनाओं की घोषणा तो की, लेकिन उनके लिए आवश्यक नियोजन और आर्थिक आधार स्पष्ट नहीं किया गया।
उन्होंने विशेष रूप से स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर शहरों को कथित तौर पर गुमराह किए जाने का मुद्दा उठाया। चव्हाण के मुताबिक दिसंबर 2014 में केंद्र सरकार के साथ मिलकर स्मार्ट सिटी और संबंधित विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन उसके लिए जरूरी तैयारी और स्पष्ट कार्ययोजना को लेकर सवाल बने रहे। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की घोषणा केवल राजनीतिक प्रचार का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके लिए ठोस वित्तीय और तकनीकी आधार भी जरूरी है।
चव्हाण ने स्मार्ट सिटी योजना के साथ-साथ शहरों में सड़कों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार स्मार्ट सिटी के नाम पर शहरों की तस्वीर बदलने के दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई इलाकों में बुनियादी सुविधाओं और सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार को विकास योजनाओं की घोषणा करने के साथ यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजनाओं पर कितना खर्च हुआ, किस स्तर पर काम पूरा हुआ और उसका वास्तविक लाभ आम नागरिकों को कितना मिला। सड़क विकास के मुद्दे पर भी उन्होंने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल बड़े बजट आवंटित करने से विकास सुनिश्चित नहीं होता।
परियोजनाओं की निगरानी, गुणवत्ता और समय पर काम पूरा होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चव्हाण ने विकास कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि और वास्तविक खर्च के बीच अंतर को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और दल-बदल के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीति में जिस तरह से राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच समीकरण बदले हैं, उससे जनता के सामने कई सवाल खड़े हुए हैं।
चव्हाण ने राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ होने वाले व्यवहार और उनके बयानों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव हुए हैं और इन बदलावों का असर शासन व्यवस्था तथा जनता के भरोसे पर भी पड़ा है।
उनके बयानों के बाद 2014 की तत्कालीन सरकार की घोषणाओं, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, सड़क विकास और बड़े बजट के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है। इस पूरे मुद्दे में विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति, खर्च और परिणामों को लेकर पारदर्शिता महत्वपूर्ण सवाल बनी हुई है।