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नागपुर जिले में कम बारिश और जलाशयों में घटते जल भंडार के कारण जल संकट की चिंता बढ़ी।
राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार, 16 अक्टूबर से महानगरपालिकाओं में 10% पानी कटौती लागू करने की बात कही गई है।
महापौर के जल संरक्षण निर्देशों के बाद भी संबंधित परिपत्र जारी नहीं होने से कार्रवाई में देरी की जानकारी सामने आई।
NMC Water Cut 10 Percent: नागपुर जिले में बारिश की कमी और जलाशयों में घटते जल भंडार के कारण संभावित जल संकट की चिंता बढ़ रही है। ऐसे समय में पेयजल की बर्बादी रोकने और उपलब्ध पानी का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मनपा की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है लेकिन स्थिति यह है कि महापौर नीता ठाकरे द्वारा जल संरक्षण के लिए निर्देश दिए जाने के एक दिन बाद भी मनपा प्रशासन इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई शुरू नहीं कर पाया।
जोन अधिकारियों को महापौर के निर्देशों से संबंधित औपचारिक परिपत्र तक जारी नहीं हुआ और पेयजल की बर्बादी के मामले में एक भी नागरिक पर जुर्माना नहीं लगाया गया। उल्लेखनीय है कि सरकार ने कम बारिश और जलाशयों में कम जल भंडारण को देखते हुए 16 अक्टूबर से महानगरपालिकाओं में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने का निर्देश दिया है।
महापौर के निर्देशों पर अधिकारियों के रुख का यह है कि उन्हें अब तक महापौर के निर्देशों के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। यहां तक कि स्पष्ट नहीं था कि इन निर्देशों के तहत उन्हें कौनसी कार्रवाई शुरू करनी है।
जानकारों की मानें तो महापौर द्वारा जल संरक्षण के निर्देश जारी किए जाने के बाद संबंधित विभागों, जोन कार्यालयों और निगरानी दलों तक स्पष्ट आदेश पहुंचना आवश्यक था लेकिन औपचारिक निर्देशों के अभाव में कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी।
सड़कों पर पानी, वर्कशॉप में वाहनों की धुलाई महापौर के निर्देशों के बावजूद दूसरे दिन सिटी में पानी का उपयोग सामान्य तौर पर ही दिखाई दिया। जहां सड़कों पर पानी रहा, वहीं वर्कशॉप में वाहनों की बदस्तूर धुलाई जारी रही। अधिकारियों के अनुसार कई नागरिक अपने घरों के सामने के रास्तों और खुले स्थानों की सफाई सुबह जल्दी करते हैं।
इसलिए यदि निगरानी दल केवल दिन के सामान्य समय में निरीक्षण करेंगे तो पानी की बर्बादी के कई मामले उनकी नजर से छूट सकते हैं। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सुबह के समय भी गश्त और जांच की जरूरत है।
महाराष्ट्र राज्य सरकार के जलसम्पदा विभाग ने कम बारिश और जलाशयों में घटते जलभंडार के मद्देनजर नगर निगमों को 16 अक्टूबर से 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने का निर्देश दिया है।
तोतलाडोह सहित प्रमुख जल स्रोतों में कम भंडारण की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। इस निर्णय का उद्देश्य उपलब्ध पानी का नियोजित उपयोग सुनिश्चित करना और जल संकट की आशंका से निपटने के लिए खपत को नियंत्रित करना है लेकिन पानी की कटौती के साथ-साथ उसकी बर्बादी रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
नागपुर मनपा के सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की अधीक्षक अभियंता श्वेता बनर्जी ने बताया कि शहर के सभी 10 जोन के सहायक आयुक्तों, उपद्रव शोध पथकों (एनडीएस) और जलापूर्ति विभाग के कर्मचारियों के माध्यम से पानी के दुरुपयोग पर निगरानी रखी जाएगी।
इस व्यवस्था के तहत जोन स्तर पर निरीक्षण कर पेयजल के अनावश्यक उपयोग की पहचान करने और संबंधित मामलों में कार्रवाई करने की योजना है लेकिन औपचारिक परिपत्र जारी नहीं होने के कारण निगरानी अभियान की शुरुआत में देरी होने की बात सामने आई।
कार्यकारी अभियंता श्रीकांत वायकर ने कहा कि इन उपायों को अगले एक-दो दिनों में लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उल्लंघन की शिकायतों के लिए अलग से कोई हेल्पलाइन जारी नहीं की जाएगी। नागरिक मनपा की मौजूदा हेल्पलाइन 155304 पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।