विदर्भ में सूखे की मार: 43 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित, दिवाली से पहले किसानों को राहत का इंतजार

Vidarbha Drought: विदर्भ में सूखे के कारण 43 लाख हेक्टेयर फसलें तबाह हुई हैं। सरकार का पंचनामा सर्वेक्षण अंतिम दौर में है, दीवाली से पहले किसानों के खातों में 5,000 की अग्रिम सहायता भेजी जाएगी।
विदर्भ के किसानों को बारिश का इंतजार
विदर्भ में सूखे के कारण किसानों परेशान(सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Highlights

  • विदर्भ में सूखे और फसल नुकसान का आकलन अंतिम चरण में पहुंचने का दावा किया गया है।

  • नागपुर और अमरावती संभाग में कुल 43 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।

  • अमरावती संभाग में 31.16 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के पंचनामे पूरे होने का दावा है।

  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिवाली से पहले किसानों को 5,000 अग्रिम सहायता देने की घोषणा की थी।

Devendra Fadnavis Farmer Relief: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से 'ट्रिगर 1' के तहत घोषित सूखाग्रस्त तहसीलों में युद्धस्तर पर चल रहे फसल नुकसान के पंचनामे (सर्वेक्षण) अब अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। विदर्भ में सूखे ने विकराल रूप ले लिया है, जिससे ग्रामीण इलाकों की स्थिति बेहद दर्दनाक हो गई है।

खेती के लिए पानी तो दूर, पीने के पानी के लिए भी कई गांवों को तरसना पड़ रहा है। नागपूर और अमरावती संभाग मिलाकर कुल 43 लाख हेक्टेयर फसलों का नुकसान हुआ है। अल नीनो के प्रभाव के चलते इस वर्ष बारिश की कमी का अंदेशा सरकार ने पहले ही जताया था, जो अब सच साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दीवाली से पहले किसानों के खातों में 5,000 रुपये अग्रिम सहायता राशि जमा करने की घोषणा की गई थी, जिस पर करीब 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

यवतमाल और अकोला जिलों में स्थिति सबसे भीषण

विदर्भ के लगभग 32 लाख खातेदार किसान इस आपदा की चपेट में आए हैं। अकेले अमरावती संभाग में 31 लाख 16 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र का पंचनामा पूरा हो चुका है। इसमें यवतमाल और अकोला जिलों में स्थिति सबसे भीषण है, जहां फसलें लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।

नागपूर संभाग के 11 लाख 34 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में से 9 लाख 59 हजार से अधिक किसानों के नुकसान का आकलन पूरा हो चुका है। पूरे विदर्भमें पंचनामे का केवल 3 से 4 प्रतिशत काम बाकी है, जिसकी रिपोर्ट जल्द ही सरकार को सौंपी जाएगी।

नागपुर संभाग के जिलों का विवरण

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विपक्ष ने 'ऊंट के मुंह में जीरा' बताते हुए नाकाफी करार दिया

हालांकि, विपक्ष ने इस मदद को 'ऊंट के मुंह में जीरा' बताते हुए नाकाफी करार दिया है और किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।

इस मांग को देखते हुए सरकार को राहत कार्यों पर कम से कम 30 से 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

जानकारों का मानना है कि किसानों की तरह ही इस प्राकृतिक आपदा के चलते राज्य सरकार की तिजोरी पर भी भारी वित्तीय बोझ पड़ने की पूरी आशंका है।

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