

Tea Price Hike Nagpur: महंगाई का असर अब आम आदमी की सबसे पसंदीदा चाय तक पहुंच गया है। नागपुर शहर में अधिकांश चाय टपरियों और स्टॉलों पर अब चाय पहले से महंगी हो गई है। जहां पहले 10 से 12 रुपये में मिलने वाली चाय अब कांच के ग्लास में 15 रुपये और डिस्पोजेबल पेपर कप में 12 रुपये में बेची जा रही है।
बढ़ती लागत के बीच चाय विक्रेताओं ने ग्राहकों की सुविधा और अपनी मजबूरी के बीच संतुलन बनाने के लिए दो अलग-अलग कीमतों का विकल्प तैयार किया है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और कार्यालयों के आसपास स्थित अधिकांश टपरियों पर यह नई दरें लागू हो चुकी हैं। सुबह-शाम चाय पीने वालों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है।
चाय विक्रेताओं का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर, दूध, चीनी, चायपत्ती, अदरक, इलायची और अन्य खाद्य सामग्री के दाम लगातार बढ़े हैं। इसके अलावा दुकान का किराया, बिजली, मजदूरी और परिवहन खर्च भी पहले की तुलना में अधिक हो गया है। दुकानदारों के अनुसार पहले जिस लागत में चाय तैयार हो जाती थी, अब उसी चाय पर काफी अधिक खर्च आ रहा है। ऐसे में पुरानी कीमतों पर चाय बेचना घाटे का सौदा बन गया था।
महंगाई के बावजूद ग्राहकों को एकमुश्त बड़ा झटका न लगे, इसलिए कई चाय विक्रेताओं ने दो तरह की कीमतें तय की हैं। डिस्पोजेबल कप का आकार छोटा होने से उसमें चाय की मात्रा कम रहती है। इसलिए उसकी कीमत 12 रुपये रखी गई है। वहीं पारंपरिक कांच के ग्लास में अधिक मात्रा में चाय परोसी जाती है, जिसके लिए 15 रुपये लिए जा रहे हैं। दुकानदारों का मानना है कि इससे ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं।
चाय विक्रेता मोहम्मद साजिद का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच कीमत बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया था।
उन्होंने बताया कि,"कमर्शियल गैस सिलेंडर, दूध, चीनी और चायपत्ती सभी महंगे हो गए हैं। पहले जैसी कीमत में चाय बेचने पर घाटा हो रहा था। इसलिए डिस्पोजेबल कप में कम मात्रा की चाय 12 रुपये और ग्लास में अधिक मात्रा वाली चाय 15 रुपये में दे रहे हैं। इससे ग्राहकों को भी विकल्प मिल जाता है और हमारा खर्च भी कुछ हद तक निकल जाता है।"
नई कीमतों से रोजाना कई बार चाय पीने वाले लोगों का मासिक खर्च भी बढ़ गया है। खासकर दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी, छात्र, ऑटो चालक, टैक्सी चालक और मजदूर वर्ग पर इसका असर अधिक देखने को मिल रहा है। हालांकि कई ग्राहकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए दुकानदारों की मजबूरी भी समझी जा सकती है।