

Nagpur Summer PM10 Pollution: सर्दियों में प्रदूषण के लिए बदनाम नागपुर इस बार गर्मी में भी वायु प्रदूषण की चपेट में रहा। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया कि मार्च से मई तक तीनों गर्मी के महीनों में शहर में पीएम 10 का स्तर राष्ट्रीय सुरक्षित मानक से अधिक रहा।
92 दिनों की निगरानी में 46 दिन यानी आधी गर्मी में पीएम 10 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर की वार्षिक सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा। इसके विपरीत मुंबई और पुणे में इसी अवधि में यह सीमा केवल 5 से 6 दिन पार हुई।
नागपुर मई में महाराष्ट्र का दूसरा और अप्रैल में ऽवां सबसे प्रदूषित शहर रहा। मई में पीएम 10 की औसत सांद्रता करीब 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुई, जो पिछले 8 वर्षों में शहर का दूसरा सबसे प्रदूषित मई है। इससे पहले 2022 में मई का औसत पीएम 10 स्तर 140 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंचा था।
शहर में पीएम 10 की निगरानी के लिए 4 सतत वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र हैं। इनमें जीपीओ सिविल लाइंस और महल केंद्रों पर मार्च से मई के दौरान लगातार सुरक्षित सीमा से अधिक पीएम 10 दर्ज किया गया। 'पीएम 10' 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण होते हैं जो सांस के साथ श्वसन तंत्र में पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने, अस्थमा तथा क्रॉनिक श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सर्दी तक सीमित नहीं प्रदूषण नागपुर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत देश के 130 नॉन-अटेनमेंट शहरों में शामिल है। इस साल जनवरी और फरवरी में शहर में पीएम 2।5 की सांद्रता सबसे अधिक रही थी। नवंबर में भी नागपुर महाराष्ट्र का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर था। ताजा विश्लेषण से स्पष्ट है कि शहर की प्रदूषण समस्या केवल सर्दियों तक सीमित नहीं है।
सीआरईए के विश्लेषक डॉ. मनोज कुमार के अनुसार गर्मियों में नागपुर का वायु प्रदूषण बार-बार सामने आने वाला पैटर्न है। सड़क की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन जिसमें ताप विद्युत संयंत्र भी शामिल है। पीएम 10 के प्रमुख स्रोत है।
गर्मियों में बारिश कम होने से वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क की धूल दोबारा हवा में घुलती है। नागपुर के आसपास औद्योगिक गतिविधियां और कोयले से चलने वाले ताप विद्युत संयंत्र भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। मुंबई जैसे तटीय शहरों में समुद्री हवाओं से प्रदूषकों का फैलाव बेहतर होता है, जबकि नागपुर जैसे अंदरूनी शहर में वेंटिलेशन अपेक्षाकृत कमजोर रहता है।
नागपुर स्थित सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की संस्थापक एवं निदेशक लीना बुधे ने कहा कि केवल सतही शहर सौंदर्याकरण परियोजनाओं से हवा साफ नहीं होगी। इसके लिए धूल नियंत्रण नियमों में सख्ती, अधिक उत्सर्जन वाले सार्वजनिक स्थानों पर विशेष फिल्ट्रेशन व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन को तेजी से इलेट्रिक बनाने तथा आवासीय क्षेत्रों में हरित बफर जोन बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने एनसीएपी के तहत उपलब्ध राशि का तत्काल उपयोग कर स्थानीय स्तर पर व्यापक वायु निगरानी व्यवस्था विकसित करने की मांग की। उल्लेखनीय है कि नागपुर महानगरपालिका ने एनसीएपी के तहत आवंटित कुल फंड का अब तक केवल 46 प्रतिशत उपयोग किया है।
नागपुर की हवा खराब, 46 दिन PM10 ज्यादा
निगरानी अवधि: मार्च से मई 2026
कुल निगरानी दिवस: 92 दिन
नागपुर में PM10 सीमा पार: 46 दिन
प्रदूषण वाले दिन: गर्मी के करीब 50% दिन
PM10 की वार्षिक सुरक्षित सीमा: 60 µg/m³
PM10 की दैनिक सुरक्षित सीमा: 100 µg/m³
मई 2026 में औसत PM10: करीब 100 µg/m³
मई में महाराष्ट्र में नागपुर की रैंक: दूसरा सबसे प्रदूषित
अप्रैल में महाराष्ट्र में रैंक: पांचवां सबसे प्रदूषित
मई 2022 में औसत PM10: 140 µg/m³
मई 2026: 8 वर्षों में दूसरा सबसे प्रदूषित मई
मुंबई-पुणे में सीमा पार: केवल 5–6 दिन
नागपुर में सतत निगरानी केंद्र: 4
प्रमुख प्रदूषित केंद्र: GPO, सिविल लाइंस और महल
NCAP के तहत नागपुर: 130 नॉन-अटेनमेंट शहरों में शामिल
NCAP फंड का उपयोग: नागपुर मनपा ने 46% फंड खर्च किया
जनवरी-फरवरी में प्रमुख प्रदूषक: PM2.5