मेरे पास थी जिम्मेदारी...मंडल यात्रा पर बोले शरद पवार, कहा- कुर्सी की चिंता नहीं

Sharad Pawar in Nagpur: नागपुर में एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने मंडल यात्रा के दौरान कई बातों का खुलासा किया। साथ ही उन्होंने मंडल यात्रा की शुरुआत पर भी प्रकाश डाला।
Sharad Pawar in Nagpur: नागपुर में एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने मंडल यात्रा के दौरान कई बातों का खुलासा किया। साथ ही उन्होंने मंडल यात्रा की शुरुआत पर भी प्रकाश डाला।
मंडल यात्रा में शरद पवार (सौजन्य-IANS)
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Sharad Pawar in Nagpur: एनसीपी-एसपी ने शनिवार को नागपुर के वैरायटी चौक से अपनी ओबीसी मंडल यात्रा की शुरुआत की। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शरद पवार ने कहा कि सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष हमारा मूल मंत्र है। यह यात्रा न केवल ओबीसी समुदाय के लिए बल्कि समाज के सभी वंचित वर्गों के लिए एक मंच प्रदान करेगी। साथ ही यह यात्रा राज्य में पार्टी के जनाधार को और मजबूत करेगी।

एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि वीपी सिंह की सरकार ने मंडल आयोग को हरी झंडी दी थी। तब सरकार में शामिल भाजपा नेताओं ने इसका विरोध करते हुए ‘कमंडल यात्रा’ निकाली थी। देश में आंदोलन उठ खड़ा हुआ था। तब राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए आयोग को लागू करने की जिम्मेदारी मेरे पास थी।

मंडल यात्रा का शुभारंभ

उन्होंने बताया कि अगर लागू किया तो राज्य की सत्ता जाने की चर्चा चल रही थी लेकिन कुर्सी की चिंता न करते हुए तत्काल मंत्रिमंडल की बैठक ली और ओबीसी को न्याय देते हुए राज्य में मंडल आयोग लागू किया। उनके हाथों नागपुर में एनसीपी ओबीसी सेल की ओर से शुरू की गई मंडल यात्रा का शुभारंभ हुआ। वे इस अवसर पर बोल रहे थे। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे, पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, सांसद अमर काले, विधायक जितेंद्र आव्हाड़, रोहित पवार, रमेश बंग, ओबीसी सेल अध्यक्ष राज राजापूरकर, प्रकाश गजभिये, दुनेश्वर पेठे, सलिल देशमुख सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

किसानों की स्थिति विकट है

शरद पवार ने कहा कि आज राज्य में शैक्षणिक व सामाजिक पिछड़ेपन का चित्र है। इसे दूर करने के लिए यात्रा के माध्यम से जनता में जागृति लाने की जरूरत है। उन्होंने ने मंडल यात्रा के माध्यम से लोगों को जागृत करने, किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याओं का निराकरण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों की अवस्था विकट हो गई है। मौसमी आपदा से उत्पादन घटा है।

ऐसे में सरकार किसानों के साथ गंभीरता से खड़ी नजर नहीं आ रही। अमीरों के करोड़ों के कर्ज माफ किया जाते हैं और किसानों की कर्जमाफी पर दुर्लक्ष हो रहा है। उन्होंने बताया कि जब वे केन्द्रीय कृषि मंत्री थे तब किसानों की आत्महत्या का दुख देखते हुए 70,000 करोड़ रुपयों की कर्जमाफी की थी।

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