चुनावी वादे हवा-हवाई, धरातल पर काम सिफर! नागपुर के वेलकम सोसाइटी और महेश नगर में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा

Nagpur Retaining Wall: नागपुर में करीब 29.65 किमी रिटेनिंग वॉल गायब या जर्जर होने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हर मानसून में हजारों लोग जलभराव और नुकसान की आशंका के बीच रह रहे हैं।
Election promises amount to nothing; zero work done on the ground! Flood threat looms once again over Nagpur's Welcome Society and Mahesh Nagar.
नागपुर, रिटेनिंग वॉल,(सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nagpur Retaining Wall Flood Risk: मानसून की पहली फुहारों के साथ ही नागपुर के निचले इलाकों में रहने वाले हजारों निवासियों की रातों की नींद उड़ गई है। शहर की नदियों और नालों के किनारों पर रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) का न होना या उनका जर्जर हो जाना मानसून के दौरान हर साल एक बड़ी आपदा को न्योता दे रहा है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार शहर में लगभग 29.65 किलोमीटर लंबी रिटेनिंग वॉल या तो गायब हैं या पूरी तरह टूट चुकी हैं, जिसके कारण रिहायशी इलाकों में बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है। हर साल बाढ़ की मार, प्रशासन से गुहार लगाने के लिए जनता मजबूर हैं।

कई इलाकों के निवासी हर भारी बारिश में दहशत में जीने को मजबूर हैं। वेलकम सोसाइटी, न्यू अहबाब कॉलोनी, महेश नगर, सूरज नगर और गोदावरी कॉलोनी जैसे इलाकों में नालों का पानी घरों में घुस जाता है। चुनाव से पहले दीवारें बनाने के कई वादे किए गए, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस काम नहीं हुआ है।

856 करोड़ का मास्टर प्लान

नागरिकों की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए नागपुर महानगर पालिका ने बाढ़ नियंत्रण के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की है। महानगर पालिका आयुक्त विपिन इटनकर ने बताया कि शहर के विभिन्न नालों और नदियों के किनारे 29.651 किमी लंबी सुरक्षा दीवार बनाने और चार पुलों के पुनर्निर्माण के लिए 856.31 करोड़ रूपए का प्रस्ताव राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग को भेजा गया है।

स्थिति की गंभीरता, अधिकांश नालों के तट असुरक्षित

एनएमसी के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पीली नदी के करीब 90% हिस्से में कोई सुरक्षा दीवार नहीं है, जिससे किनारे की बस्तियां भू-कटाव और बाढ़ की चपेट में आने के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गई है। नागपुर की जल निकासी प्रणाली में नाग, पीली और पोरा नदियों के अलावा 227 छोटे-बड़े नाले शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश के तट असुरक्षित है।

आयुक्त विपिन इटनकर ने विश्वास जताया कि यदि समय पर धन प्राप्त हो जाता है, तो इन सुरक्षा दीवारों के निर्माण और कमजोर पुलों को ठीक करने से बाढ़ के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को कितनी जल्दी मंजूरी देती है, ताकि नागपुर के निवासियों को 'बाढ़ के डर' से मुक्ति मिल सके।

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