नागपुर में फ्लैट के नाम पर 69 लाख की ठगी, नंदनवन पुलिस ने 4 आरोपियों पर कसा शिकंजा

Nagpur Wathoda Flat Fraud: नागपुर के वाठोडा में फ्लैट का कब्जा और रजिस्ट्री देने से इनकार कर 69 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। नंदनवन पुलिस ने सद्दाम अली की शिकायत पर 4 के खिलाफ FIR दर्ज की।
Nagpur Real Estate Fraud
फ्लैट के नाम पर ठगी प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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Nagpur Real Estate Fraud: नागपुर वाठोडा स्थित एक जमीन पर फ्लैट बनाकर देने का झांसा देकर 1 व्यक्ति से 69 लाख रुपये लिए गए। बाद में पलैट का कब्जा व रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया। इस प्रकरण में नंदनवन पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

आरोपियों में श्रावण अपार्टमेंट, वाठोडा निवासी दूतावास श्रावण वैद्य, अमितकुमार भैसारे, नागभूमि लेआउट, छत्रपतिनगर निवासी राजीव चुन्नीलाल अग्रवाल और नरहरी श्यामराव सुपारे का समावेश है। पुलिस ने यादवनगर निवासी सद्दाम अली अकबर अली की शिकायत पर मामला दर्ज किया है।

जानकारी के अनुसार

नागपुर वाठोडा स्थित सद्दाम अली का रानी दुर्गावती चौक में मांस विक्री का व्यवसाय है। राहुल चोले उनका नियमित ग्राहक था। दूतावास वैद्य राहुल का ससुर है। वैद्य ने सद्दाम को वाठोडा स्थित कैलाश सहकारी गृह निर्माण संस्था में अपनी जमीन पर'श्रावण अपार्टमेंट' बनाने की जानकारी दी।

जनवरी 2020 में राजीव अग्रवाल, वैद्य और राहुल चोले ने सद्दाम अली को उक्त जमीन पर बुलाकर अपार्टमेंट में 2 फ्लैट खरीदने का प्रस्ताव दिया। सद्दाम ने सहमति जताई और बैंक से कर्ज लेकर राहुल के माध्यम से वैद्य को 69 लाख रुपए दिए।

अपार्टमेंट का निर्माण पूरा होने के बाद सद्दाम अली ने फ्लैट का कब्जा और रजिस्ट्री करने को कहा, लेकिन आरोपियों ने इनकार कर दिया। इसी दौरान राजीव अग्रवाल ने एक फ्लैट की रजिस्ट्री नरहरी सुपारे के नाम कर दी। बाद में नरहरी ने वही फ्लैट अमित भैसारे के नाम कर दिया।

सद्दाम ने इस संबंध में राहुल और वैद्य से पूछताछ की तो राहुल ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। वर्ष 2024 में राहुल की मृत्यु हो गई। इसके बाद सद्दाम ने नंदनवन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिष षड्यंत्र रचकर धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है।

साइबर ठगों ने लगाया 60 लाख का चूना

नागपुर वाठोडा स्थित एक जमीन पर फ्लैट बनाकर देने का झांसा देकर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को धमकाकर 60.60 लाख रुपये का चूना लगा दिया। ठगों ने खुद को नागपुर पुलिस मुख्यालय और लखनऊ एटीएस का अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉड्रिग मामले में फंसाने की धमकी दी।

साइबर पुलिस ने 65 वर्षीय पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, 5 सितंबर को पीड़ित वृद्ध अपने घर पर थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर वाट्सएप कॉल आया। 'चिराग' नामक व्यक्ति ने खुद को नागपुर पुलिस मुख्यालय से बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर आईसीआईसीआई बैंक में खाता खोला गया है। इस खाते का इस्तेमाल आतंकवादियों द्वारा मनी लॉन्ड्रग के लिए किया गया है। आरोपी ने उनके खिलाफ अपराध दर्ज होने का डर दिखाया।

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के खाते में

इसके बाद वाट्सएप वीडियो कॉल पर भूपेशकुमार नामक व्यक्ति ने खुद को लखनऊ एटीएस का अधिकारी बताते हुए 2 घंटे के भीतर पूछताछ के लिए वहां पहुंचने को कहा।

पीड़ित ने लखनऊ जाने में असमर्थता जताई तो आरोपियों ने उन्हें जांच पूरी होने तक 'डिजिटल अरेस्ट' किए जाने का झासा दिया ठगों ने पीड़ित से कहा कि जांच पूरी होने तक उनके पास मौजूद पूरी रकम 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया' के खाते में जमा करनी होगी, विश्वास दिलाने के लिए आरोपियों ने उन्हें फर्जी बैंक स्टेटमेंट, डेबिट कार्ड, एनआईए और आरबीआई के नाम से तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज भी भेजे।

नागपुर जिले वाठोडा स्थित आरोपियों ने करीब 2 दिन तक पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर निगरानी में रखा 7 सितंबर को उनके खाते से 60.60 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम गंवाने के बाद पीड़ित ने घटना की जानकारी परिजनों को दी। परिजनों ने पूरे मामले की पड़ताल की तो उन्हें साइबर ठगी का पता चला।

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