ब्लड टेस्ट होना था, उससे पहले ही मौत, नागपुर में युवती की मौत पर अस्पताल में भारी बवाल, परिजनों ने की तोड़फोड़

Parshivni Hospital Death: पारशिवनी के निजी अस्पताल में युवती की मौत पर बवाल! परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, अस्पताल में तोड़फोड़ और मारपीट। पुलिस ने मामला दर्ज किया।
Tensions erupt in Parshivni after the death of 22-year-old Kiran Shendre at Sai Samarth Hospital.
युवती की मौत (सौजन्य-नवभारत)
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Parshivni Police Investigation: पारशिवनी स्थित साई समर्थ निजी अस्पताल में उपचार के दौरान 22 वर्षीय युवती किरण शिवाजी शेंद्रे की मौत हो जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मृतका चारगांव निवासी थी और पैर में दर्द की शिकायत के चलते शनिवार रात करीब 10 बजे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराई गई थी। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और गलत उपचार के कारण युवती की मौत हुई।

उनका कहना है कि डॉक्टरों ने ब्लड टेस्ट कराने को कहा था, जिसे सुबह कराने की बात कही गई थी, लेकिन इससे पहले ही उपचार के दौरान तड़के करीब 3 बजे युवती की मौत हो गई। मृतका के परिजन रितिक शेंद्रे की शिकायत पर पारशिवनी पुलिस ने मर्ग के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पारशिवनी (Parshivni) पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। नागरिकों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।

सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी युवती

जानकारी के अनुसार, मृतका बचपन से सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी और उसका इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवेगांव खैरी में चल रहा था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल लाया गया था।

अस्पताल पर आर्थिक शोषण के भी आरोप

स्थानीय नागरिकों ने अस्पताल पर अनावश्यक भर्ती और अधिक शुल्क वसूलने के आरोप लगाए हैं। साथ ही अस्पताल में पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव की भी शिकायत की गई है। नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की योग्यता की जांच की मांग की है।

परिजनों का हंगामा, अस्पताल में तोड़फोड़

घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ कर डॉक्टरों के साथ मारपीट की। इस दौरान सोनोग्राफी मशीन सहित अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया गया। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि मरीज के परिजनों ने सिकल सेल बीमारी की जानकारी पहले नहीं दी थी और ब्लड टेस्ट में देरी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि मरीज की मौत के बाद परिजनों ने हिंसक व्यवहार किया।

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