

Maharashtra Pathvikreta Yojana: नागपुर में गुरुवार को मनपा मुख्यालय में हुई टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में राज्य सरकार की नई स्ट्रीट वेंडर्स पॉलिसी का खुलासा किया गया। इसमें अब टीवीसी के सदस्य एवं हॉकर्स यूनियन के महासचिव अब्दुल रज्जाक कुरेशी की ओर से इसका अध्ययन करने और सुझाव रखने के लिए समय देने की मांग किए जाने के बाद टीवीसी की बैठक स्थगित कर दी गई।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि नई स्ट्रीट वेडर्स पॉलिसी पर 30 सिंतबर तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेज दिया जाएगा। पूरे राज्य में एक समान स्ट्रीट वेंडर्स पॉलिसी लागू होगी।
राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने स्ट्रीट वेंडर्स के आजीविका संरक्षण और व्यवसाय के नियमन के लिए 'महाराष्ट्र पथविक्रेता योजना, 2026' का मसौदा तैयार किया है। इस प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य राज्यभर के फेरीवालों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हुए उनके व्यवसाय के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना और शहरों में सुव्यवस्थित वेंडिंग जोन बनाना है।
राज्य सरकार की नीति के नए मसौदे के अनुसार जब तक सभी फेरीवालों का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा नहीं हो जाता और पात्र वेंडर्स को बिक्री प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाता, तब तक किसी भी फेरीवाले को हटाया नहीं जाएगा। योजना के तहत टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) की देखरेख में 6 महीने के भीतर व्यापक डिजिटल सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा।
इसे 3 महीने में पूरा करना होगा। डेटा के डुप्लिकेशन को रोकने के लिए मोबाइल एप, ओटीपी और बायोमेट्रिक प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। फिक्स स्टॉल्स की 'जियो टैगिंग' और फेरी लगाने वालों (मोबाइल वेंडर्स) की 'जियो-फेंसिंग' की जाएगी। प्रथम सर्वेक्षण के बाद हर 5 साल में पुनः सर्वेक्षण कराया जाएगा।
नागपुर जिला में जिन स्वाभाविक बाजारों में 50 वर्षों से अधिक समय से फेरीवाले व्यवसाय कर रहे हैं, उन्हें 'पारंपरिक बाजार' (हेरिटेज मार्केट) घोषित किया जाएगा और वहां से वेंडर्स को नहीं हटाया जाएगा।
मंत्रालय, विधान भवन, हाई कोर्ट, कलेक्टोरेट, पुलिस कमिश्नरेट और सामान्य अस्पतालों के प्रवेश द्वारों से 100 मीटर, रेलवे स्टेशनों से 150 मीटर तथा रेलवे क्रॉसिंग और बस स्टैंड से 100 मीटर के दायरे में फेरी लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
किसी फेरीवाले का प्रमाणपत्र रद्द होने पर उसे जगह खाली करने के लिए 30 दिनों का नोटिस दिया जाएगा, समय पर जगह खाली न करने पर 250 रुपये प्रतिदिन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नियमों के छोटे उल्लंघनों पर प्रमाणपत्र रद्द करने के बजाय 2000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। अनधिकृत बिक्री पर जब्त की गई खराब होने वाली सामग्री के लिए उसी दिन तथा गैर-खराब सामग्री के लिए 3 दिनों के भीतर दावा करना होगा।
दावा करने पर नाशवंत सामान 24 घंटे में और अन्य सामान 2 कार्यदिवसों में जुर्माना भरने के बाद लौटा दिया जाएगा। योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए हर 2 वर्ष में गैर सरकारी संगठनों नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से 'सोशल ऑडिट' भी कराया जाएगा।