नागपुर की वैनायक ग्रंथालय: शोधकर्ताओं के लिए ज्ञान का भंडार, 3000 दुर्लभ पुस्तकों का खजाना

Nagpur Vainayak Granthalaya: नागपुर के हुड़केश्वर रोड स्थित 'वैनायक ग्रंथालय' में 3000 से अधिक दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह। इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और वेद-पुराण पर शोधकर्ताओं के लिए खास।
Nagpur's Vinayak Library: A Repository of Knowledge for Researchers—A Treasure Trove of 3,000 Rare Books
नागपुर लाइब्रेरी, (प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Research Library: नागपुर शहर के बहुत ही कम लोगों को यह जानकारी होगी कि हुड़केश्वर रोड में श्री कॉलोनी में एक लाइब्रेरी है। यह निजी लाइब्रेरी वीरेंद्र लक्ष्मण देशपांडे की है। उन्होंने अपनी इस लाइब्रेरी का नाम 'वैनायक ग्रंथालय' रखा हुआ है। वीरेंद्र ने बताया कि उनकी लाइब्रेरी में सभी विषयों के 2,800 से 3,000 पुस्तकों, प्राचीन ग्रंथ, पुराणों का संग्रह है।

स्वतंत्रता संग्राम गाथाओं का संग्रह तो ऐसा है कि अनेक रिसर्च करने वाले विद्यार्थी संदर्भ लेने आते हैं। इतिहास, वैदिक उपनिषद, क्रांतिकारियों के बलिदान की सच्ची कहानियां, तिलक जी की पुस्तकें, 1857 की क्रांति से संबंधित पुस्तकों का संग्रह, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर की संपूर्ण साहित्य कथा के अतिरिक्त सभी संतों के साहित्य, स्वास्थ्य संबंधी पुस्तकें, कथा-कादंबरी, ललित साहित्य, शैक्षणिक और सामाजिक पुस्तकों के विशाल संग्रह यह लाइब्रेरी समेटे हए।

रिसचर्स, पीएचडी करने वालों के लिए सहायक

देशपांडे ने बताया कि अलग-अलग विषयों में रिसर्च करने वाले विद्यार्थी, लेखक, पीएबडी करने वाले, जिन्हें किन्हीं विषयों के संदर्भ की जरूरते होती है। यह मेरी इस निजी लाइब्रेरी में आते हैं उन्हें जिन विषय के संदर्भ की जरूरत होती है। संबंधित पुस्तकों से ढूंढ कर ले जाते हैं। इस लाइब्रेरी में अनेक संदर्भ ग्रंथों का भी संग्रह है, जिन्हें ज्ञान की जरूरत है उनके लिए यह लाइब्रेरी वरदान से कम नहीं है। अनेक सरकारी आयोजनों में जब किसी विशेष विषयों की तरवीरों, जानकारियों की जरूरत होती है तो उनकी लाइब्रेरी उनके लिए भी सहायक सिद्ध हो रही है।

रीडिंग का शौक बन गया जुनून

उन्होंने बताया कि बचपन से ही पढ़ने का शौक था। समय के साथ-साथ रीडिंग का शौक जुनून बन गया। धीरे-धीरे किताबों का संग्रह बढ़ता गया और आज यह एक बड़ी निजी लाइब्रेरी के रूप ले चुका है। आज अनेक पुस्तक प्रेमी इस लाइब्रेरी में आते हैं और अपनी पसंद की किताबें ले जाते हैं।

अलग-अलग विषयों पर पीएचडी करने वाले विद्यार्थी, व्यक्ति, शिक्षक लाइब्रेरी का लाभ उठाते हैं। संग्रह में विष्णु शास्त्री विपनूरकर के निबंध माला, धर्म सिंधु, व्यायाम के पुराने ग्रंथ, छत्रपति शिवाजी महाराज की किताबों का संग्रह अमोल धरोहर के रूप में यहां संग्रहित हैं।

देशपांडे को इस बात की बेहद खुशी होती है कि उनकी लाइब्रेरी का उपयोग ज्ञान अर्जित करने के लिए सैकड़ों लोग उठा रहे है। अनेक संगठन, संस्थाएं, पुरातत्व विभाग आदि को जरूरत पड़ने पर इतिहास संबंधी, आजादी की लड़ाई में शामिल हुए वीरों के बारे में जानकारी आदि इस लाइब्रेरी से ही लिए गए है। देशपांडे मानते हैं कि पुस्तक ही सच्चे मित्र होते हैं।

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