मनीषनगर अंडरपास: 1 फीट गहरा गड्ढा और टूटी रेलिंग ले सकती है किसी की जान, प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार?

Manish Nagar Underpass Nagpur: मनीषनगर पुराने अंडरपास में 1 फीट का गहरा गड्ढा और टूटी रेलिंग बनी जानलेवा। कम रोशनी और जलजमाव से दुर्घटना का बढ़ा खतरा। प्रशासन की लापरवाही पर जनता में रोष।
Dangerous 1-foot deep pothole and broken iron railings in Manish Nagar old underpass pose a threat to commuters. Poor lighting and waterlogging add to the risk.
मनीषनगर अंडरपास (सौजन्य-नवभारत)
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Underpass Waterlogging Issue: मनीषनगर के पुराने अंडरपास में इन दिनों लोहे की रेलिंग में करीब एक फिट का गड्ढा पड़ गया है जो वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी है। दिन में तो यह गड्ढा फिर भी वाहन चालकों को दिखाई देता है लेकिन रात के समय रोशनी के अभाव में यह गड्ढा दिखाई नहीं देता। कई वाहन इस गड्ढे से उछलकर अनियंत्रित भी हुए हैं। ऐसा होते हुए भी संबंधितों ने इस ओर ध्यान देना गंवारा नहीं समझा।

जब से मनीषनगर का यह अंडरपास बना है तब से किसी न किसी कारण से विवादों में घिरा रहा है। इस अंडरपास में सालभर पानी जमा रहता है जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से यह समस्या आज भी बरकरार है। बारिश के दिनों में तो समस्या और भी गंभीर हो जाती है।

बरसात के मौसम में यहां पानी घुटनों तक जमा रहता है। ऐसी परिस्थिति में वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है। इस अंडरपास के बीच में सोलर एलईडी लाइट लगे हुए हैं। इनकी रोशनी रात के समय धीमी हो जाती है। कम रोशनी के कारण भी अंडरपास से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी हो जाती है। सामने से आने वाले वाहनों की तेज रोशनी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

एक माह से गड्ढे की समस्या

इस मनीष अंडरपास में कुछ स्थानों पर नीचे लोहे की रेलिंग लगाई गई है। वर्तमान स्थिति में यह रेलिंग अपनी पकड़ छोड़ चुकी है। जब भी कोई वाहन इन रेलिंग से गुजरता है तो जोर की आवाज होती है। इसी रेलिंग के एक हिस्से में करीब एक फिट का गड्ढा पड़ गया है। यह गड्ढा दूर से वाहन चालकों को दिखाई नहीं देता।

बड़े वाहन तो फिर भी इस गड्ढे से आसानी से गुजर जाते हैं लेकिन यदि कोई दुपहिया वाहन चालक इस पर से गुजरा तो निश्चित ही वह दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है। ऐसे में जल्द से जल्द इस गड्ढे को बंद करने की मांग कुछ स्थानीय और जागरूक नागरिकों द्वारा संबंधित विभाग और प्रशासन से की गई है।

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