नागपुर: मछली पालन के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी; हाई कोर्ट ने आरोपी राजेश बंसोड की डिस्चार्ज अर्जी की खारिज

नागपुर में मछली पालन के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी के मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी।
nagpur-144
Published on: 
Updated on: 

Nagpur High Court News: नागपुर में मछली पालन के नाम पर निवेशकों से लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने आरोपी राजेश ताराचंद बंसोड की डिस्चार्ज अर्जी खारिज करते हुए उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फालके ने सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निवेश पर ऊंचे रिटर्न का वादा ‘डिपॉजिट’ की श्रेणी में आता है, इसलिए मामला MPID अधिनियम के तहत चलेगा।

लुभावने रिटर्न का दिया था झांसा

मामले के अनुसार, आरोपी ने फिश फार्मिंग (केज कल्चर) के नाम पर निवेशकों को 1.5 से 6 गुना तक रिटर्न देने का लालच दिया। शिकायतकर्ता ध्रुव सक्सेना और उनकी पत्नी ने वर्ष 2017 में करीब 48.85 लाख रुपये निवेश किए थे।

चेक बाउंस होने से खुला मामला

निवेश पर रिटर्न मांगने पर आरोपी ने पोस्ट-डेटेड चेक दिए, जो बैंक में बाउंस हो गए। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420), आपराधिक विश्वासघात (धारा 406, 409) और एमपीआईडी एक्ट की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने माना कि आरोपी ने निवेशकों के भरोसे का दुरुपयोग किया है, जो गंभीर अपराध है। कोर्ट ने विशेष अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी को डिस्चार्ज देने से इनकार किया गया था।

बचाव पक्ष की दलील खारिज

आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि यह निवेश व्यापारिक था और उसके पास महाराष्ट्र मत्स्य विकास निगम के वैध टेंडर भी थे। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं मानते हुए अर्जी खारिज कर दी।

अब इस मामले में आरोपी के खिलाफ विधि अनुसार ट्रायल चलेगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com