

नागपुर कलेक्टर ने स्नातक चुनाव के चलते 21, 23 और 27 अक्टूबर को ड्राई डे की घोषणा की थी।
कलेक्टर के आदेश पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
चंद्रपुर और भंडारा जिलों में भी इस प्रतिबंधात्मक आदेश पर अंतरिम रोक।
नागपुर, चंद्रपुर और भंडारा में शुरू रहेगी शराब की दुकानें।
Graduates Election Dry Day in Nagpur: नागपुर विधान परिषद के लिए होने वाले स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर कलेक्टर ने संपूर्ण जिले में शराब की दुकानों को पूरी तरह से बंद रखने के लिए 16 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत 21 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 23 अक्टूबर की शाम 4 बजे तक और इसके अलावा मतगणना के दिन यानी 27 अक्टूबर को भी जिले की सभी शराब की दुकानें बंद रखने की सख्त हिदायतें दी गई थीं। हालांकि हाईकोर्ट ने कलेक्टर के फैसले पर रोक लगा दी है।
बता दें कि नागपुर समेत महाराष्ट्र की कई सीटों पर विधान परिषद के लिए स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर 23 अक्टूबर को मतदान होगा। इसे देखते हुए नागपुर कलेक्टर कुमार आशीर्वाद ने जिले में शराब की दुकानों को बंद रखने के लिए 16 अक्टूबर को आदेश जारी किए।
कलेक्टर के आदेश के अनुसार 21 अक्टूबर की शाम 4 से 23 अक्टूबर की शाम 4 बजे तथा तथा मतगणना के दिन 27 अक्टूबर को भी सभी दुकानों को बंद रखने की हिदायतें दी गई थीं। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने नागपुर कलेक्टर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद लोगों के मन में संशय है कि शराब की दुकानें खुली रहेगी या बंद? इसका उत्तर है नागपुर में चुनाव के दौरान यानी 21 से 23 अक्टूबर के बीच भी शराब की दुकानें शुरू रहेगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में नागपुर जिले भर में लागू इस विस्तृत शराब प्रतिबंध को मनमाना और असमान बताते हुए चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि महाराष्ट्र शराबबंदी अधिनियम, 1949 की धारा 142(1) के तहत निर्धारित वैधानिक शर्तों का इस आदेश को जारी करते समय सही ढंग से पालन नहीं किया गया था।
चुनाव से संबंधित पूर्व में दिए गए अदालती आदेशों का हवाला देते हुए याचिका में इस प्रतिबंधात्मक आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने याचिका पर विचार करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की है। नागपुर जिले के साथ-साथ चंद्रपुर और भंडारा जिलों के लिए भी राहत मंजूर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित बोधलकर और अधिवक्ता पार्थ मालवीय ने पैरवी की।