

Nagpur Nag Nadi Rejuvenation Project: नागपुर नाग नदी के पुनरुज्जीवन प्रकल्प को लेकर भले ही जून 2014 में ही संकल्पना तैयार की गई हो लेकिन कई तरह के पेंच होने के कारण अब तक वास्तविक कार्य की शुरुआत नहीं हो पाई। आश्चर्यजनक यह है कि केंद्र से लेकर महानगरपालिका तक भाजपा की सत्ता होने के बावजूद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के महत्वाकांक्षी प्रकल्प को ग्रहण लगा हुआ है।
इससे प्रकल्प कब पूरा होगा? इसे लेकर चर्चाएं जारी हैं। प्रकल्प को लेकर अब तक हुई प्रक्रिया के अनुसार पहले वित्तीय नियोजन समिति के समक्ष पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया गया। ईएफसी की ओर से मंजूरी प्रदान की गई। यहां तक कि केंद्रीय कैबिनेट ने भी मंजूरी दी किंतु 12 साल में नाग नदी केवल 'अढ़ाई कोस' ही चल पाई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में 1,476 करोड़ रुपए का प्रकल्प तैयार किया गया था। अब वर्ष 2021 में इसी प्रकल्प पर 2,117 करोड़ रुपए का खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
प्रकल्प के लिए तैयार किए गए डीपीआर के अनुसार उत्तर जोन में 249 किलोमीटर की सीवरेज लाइन तथा मध्य जोन में 211।60 किलोमीटर की सीवरेज लाइन बदली जाएगी। प्रकल्प पूरा होने पर नाग नदी, बोरनाला और पीली नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। डीपीआर के अनुसार वर्ष 2049 में प्रकल्प पूरा होने की आशा है।
प्रकल्प को लेकर तैयार किए गए प्रारूप के अनुसार 2.117.56 करोड खर्च होने का अनुमान है। प्रकल्प में केंद्र सरकार से 60 प्रतिशत, राज्य सरकार से 25 प्रतिशत और मनपा को 15 प्रतिशत खर्च का वहन तय किया गया। जिसके अनुसार केंद्र सरकार से 1,323.42 करोड़, राज्य सरकार की ओर से 496.34 करोड़ और मनपा को 297.80 करोड़ रुपए का बोझ उठाने का निर्णय लिया गया। प्रकल्प के लिए केंद्र सरकार की ओर से जापान की वित्तीय संस्था जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी से 1,864 करोड़ का कर्ज लेने पर भी मुहर लगाई गई।
प्रकल्प पर मनपा द्वारा अमल किया जाना है जिसके लिए नदी में छोड़े जाने वाले मल-जल को रोकने, प्रक्रिया करने, मल-जल प्रक्रिया केंद्र स्थापित करने जैसे कामों को अंजाम दिया जाना है। प्रकल्प के लिए कर्ज को लेकर एग्रीमेंट होने से बाद भी केवल नाम के लिए एक दो स्थानों पर एसटीपी बनाए जाने का दावा किया जा रहा है।