

Maharashtra Graduate Constituency Election: नागपुर मनपा में प्रशासक राज के 4 वर्षों बाद भले ही आम चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा सत्ता में आई हो लेकिन पहले ही वर्ष के कार्यकाल में मंगलवार को दूसरी बार आचार संहिता का झटका लगा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मनपा में सत्ता बनाने के बाद मई माह में चौथे कार्यकाल का बजट बनाने की प्रक्रिया चल रही थी।
इसी दौरान स्थानीय निकायों के अंतर्गत आने वाली विधान परिषद की सीट को लेकर चुनाव की घोषणा हो गई जिससे मई में पेश होने वाला बजट एक माह देरी से प्रस्तुत करना पड़ा। इसी तरह से अब स्नातक सीट के लिए मंगलवार को चुनाव घोषित किए गए जिससे अब दूसरी बार मनपा में काम ठप पड़ गया है जिसका विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ने के आसार है।
नागपुर मनपा में चुनाव की घोषणा होते ही कई पार्षदों की ओर से मनपा का कामकाज ठप होने पर कड़ी प्रतिक्रिया उजागर की गई। पार्षदों का मानना था कि किसी तरह से विकास के लिए निधि पाने अब तक कड़ी लड़ाई लड़कर जुगाड़ किया जा रहा था।
कुछ निधि मिली भी नहीं है कि अब आचार संहिता लग गई जिससे प्रभाग में विकास कार्य करना संभव ही नहीं होगा। लगभग डेढ़ माह तक इस परेशानी से गुजरना पड़ेगा, जबकि प्रभाग में बारिश के बाद समस्याएं निकट है जिन्हें विकास कार्यों के माध्यम से हल करना था।
नागपुर मनपा में प्रशासक राज के 4 वर्षों बाद भले ही आम चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा सत्ता में आई हो लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय निकाय और स्नातक चुनाव क्षेत्र के तहत विधान परिषद की दोनों सीटों के लिए चुनाव होना तय था। 24 बाय 7 चुनावी मोड में रहने वाली भारतीय जनता पार्टी को भलीभांति इसकी जानकारी भी थी किंतु वह पूरी तरह से बेफिक्र रही। यही कारण रहा कि स्थायी समिति में विकास कार्यों की फाइले उस गति से प्रस्तुत करने की दिशा में कोई सकारात्मक प्रयास तक नहीं हुए।
यही कारण रहा कि पहले वर्ष के कार्यकाल में बजट को लागू करने में भी ढुलमुल रवैया ही दिखाई दिया। जानकारों की मानें तो केवल कुछ पदाधिकारियों को निधि प्राप्त हो गई जिनकी कुछ फाइलों को टेंडर तक का सफर तय करना आसान भी रहा। किंतु 160 पार्षदों में से 150 के करीब पार्षद ऐसे रहे जिनके प्रभाग में विकास कार्यों के लिए बनाई गई फाइलें टेंडर तक भी नहीं पहुंच पाई जिसका पार्षदों को अब खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
चुनाव घोषित होने के बाद आचार संहिता लगते ही अब आदर्श आचार संहिता का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
हालांकि इसकी जानकारी होने के कारण पदाधिकारियों की ओर से सर्वप्रथम वाहन तो लौटा दिए गए किंतु आदर्श आचार संहिता का असर इन पदाधिकारियों को मिलने वाली अन्य सेवाओं पर भी पड़ने की जानकारी प्रशासन ने दी।
मंगलवार को सूचना मिलते ही महापौर नीता ठाकरे, उपमहापौर लीला हाथीबेड, सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर, विपक्ष नेता संजय महाकालकर आदि ने वाहन लौटा दिए।
विशेषतः सत्ता पक्ष नेता ने पहले ही सरकारी वाहन लौटा दिया था। यहां तक कि मंगलवार को निजी वाहन पर लगा सत्ता पक्ष नेता का बोर्ड और झंडा भी उतार दिया।