नागपुर MLC सीट पर किसे मिलेगा मौका? बावनकुले की सीट पर भाजपा का नया चेहरा कौन? बढ़ी हलचल

Nagpur MLC Seat: नागपुर विधान परिषद सीट पर 18 जून को चुनाव होगा। भाजपा की इस सीट पर डॉ. राजीव पोतदार और दयाशंकर तिवारी के नामों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
Who will get the opportunity for the Nagpur MLC seat? Who will be the BJP's new face for Bawankule's seat? Speculation intensifies.
नागपुर विधान परिषद,चंद्रशेखर बावनकुले(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur MLC Seat BJP Politics: नागपुर विधान परिषद सोट चंद्रशेखर बावनकुले के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद नवंबर 2024 से रिक्त है। अब चुनाव आयोग ने यहां भी 18 जून को चुनाव घोषित कर दिया है। यह सीट भाजपा के पास थी इसलिए उसका ही दावा समझा जा रहा है लेकिन किसे मौका मिलेगा इसे लेकर फिलहाल कयास ही लगाए जा रहे हैं। नागपुर स्थानीय निकाय संस्था निर्वाचन क्षेत्र की इस सीट पर पहली दावेदारी डॉ. राजीव पोतदार को समझी जा रही है। वह भी इसलिए क्योंकि संदीप जोशी की रिक्त सिटी पर शहर के संजय भेंडे को पार्टी ने अवसर दिया है।

अब इस सीट के लिए ग्रामीण भाजपा के किसी पदाधिकारी को पुरस्कृत किया जा सकता है। ग्रामीण भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजीव पोतदार के समर्थकों का तर्क है कि सिटी को भेंडे के रूप में एक प्रतिनिधित्व दिया गया है तो कामठी की सीट पर ग्रामीण भाजपा को ही मौका मिलना चाहिए, बताते चलें कि सावनेर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बरिष्ठ नेता सुनील केदार के राजनीतिक वर्चस्व को समाप्त करने में पोतदार ने पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

आशीष देशमुख के लिए अपनी सोट छोड़कर कांटे से कांटा निकालने की उनकी रणनीति बेहद सफल रही थी। यह भी बता दें कि एक कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पार्टी में आयातित लोगों की बजाय निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान करने और पोतदार को विधायक बनाने की अपील की थी। दूसरी ओर, यदि बीजेपी एक बार फिर सिटी को प्राथमिकता देती है तो पूर्व महापौर और वर्तमान शहराध्यक्ष दयाशंकर तिवारी मोस्ट वेटेड हैं।

वे वरिष्ठ हैं और लंबे समय से पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। हिन्दीभाषी समाज के चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। वहीं मुख्यमंत्री के बेहद करीबी पूर्व नगरसेवक विक्की कुकरेजा के नाम की भी चर्चा जोरों पर है।

यह भी बताते चलें कि चंद्रशेखर बावनकुले की उम्मीदवारी से पहले विक्की कुकरेजा का नाम काफी आगे माना जा रहा था लेकिन उस समय पार्टी के लिए बावनकुले का राजनीतिक पुनर्वास करना जरूरी हो गया था। विधानसभा चुनाव में झटका लगने और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हार के बाद भाजपा ने इसी सीट से चंद्रशेखर बावनकुले को मौका देकर उनका राजनीतिक पुनर्वास किया था।

निर्विरोध चुनाव का प्रयास : बावनकुले

पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि यह चुनाव निर्विरोध कराने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा का 70 फीसदी कब्जा है। निर्विरोध चुनाव के लिए सभी मित्र दलों से चर्चा की जाएगी।

कांग्रेस ने खेला था गेम

वह चुनाव काफी चर्चित रहा था क्योंकि कांग्रेस ने आरएसएस के स्वयंसेवक छोटू भोयर को उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक दांव खेलने की कोशिश की थी, हालांकि कांग्रेस नेताओ ने उन्हें अंत तक स्वीकार नहीं किया। कई नाटकीय घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस ने अंतिम समय में अपना आधिकारिक उम्मीदवार बदल दिया जिसके कारण भौयर को केवल। वोट मिला था।

इसके बाद चंद्रशेखर बावनकुले प्रदेशाध्यक्ष बने और आगे चलकर कामठी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए, तबसे यह सीट पिछले डेढ़ वर्ष से रिक्त पड़ी है। हालांकि इतिहास में पहली बार यह चुनाव जिला परिषद सदस्यों के बिना हो रहा है, जिप सदस्य मतदान प्रक्रिया से बाहर रहने वाले है जिससे राजनीतिक समीकरण बदल गए है। हालांकि मनपा और जिले की नगर पालिकाओं में वर्चस्व होने के कारण यह चुनाव तकनीकी रूप से भाजपा के लिए काफी आसान माना जा रहा है।

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