

AIIMS Nagpur On Health Tech Innovation: भारतीय चिकित्सा संसदीय मंच (IMPF) के राष्ट्रीय नीति शिखर सम्मेलन में चिकित्सा प्रौद्योगिकी (MedTech) को मरीजों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने और देश में स्वदेशी तकनीक के विकास के लिए चिकित्सा संस्थानों, शोधकर्ताओं और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
गुजरात के वापी में ‘स्वस्थ भारत से सक्षम भारत : भारत में मेडटेक पहुंच की नई परिकल्पना’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में एम्स नागपुर के विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों को केवल बाहर विकसित तकनीकों को अपनाने या उनका परीक्षण करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें मरीजों की अधूरी नैदानिक जरूरतों की पहचान कर उनके अनुरूप तकनीक विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
एम्स नागपुर के डॉ. प्रशांत पी. जोशी ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों को इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के साथ मिलकर ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए, जो वास्तविक चिकित्सा जरूरतों को पूरा करे। उन्होंने चिकित्सा और इंजीनियरिंग संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान, अकादमिक कार्यक्रम, फेलोशिप और प्रशिक्षण को मजबूत करने की जरूरत बताई।
डॉ. प्रशांत पी. जोशी ने कहा कि एम्स नागपुर और आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थानों के साथ इस तरह के सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह का अंतर्विषयक सहयोग भारत में चिकित्सा प्रौद्योगिकी के नवाचार को मजबूत करने के साथ मरीजों की देखभाल में सुधार ला सकता है।
वहीं राज्यसभा सांसद और आईएमपीएफ के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे ने कहा कि केवल नई तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका मरीजों तक पहुंचना भी जरूरी है। पहुंच के बिना नवाचार का प्रभाव सीमित रहता है और विश्वसनीय साक्ष्य के बिना तकनीक की पहुंच को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल है।
आईएमपीएफ के अध्यक्ष डॉ. अनिल बोंडे ने भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मेडटेक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास, विश्वसनीय नैदानिक साक्ष्य, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन और टिकाऊ प्रतिपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों की पहुंच बढ़ने के साथ इनके इस्तेमाल के लिए आवश्यक चिकित्सकीय कौशल, बुनियादी ढांचे और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र होना चाहिए, जिसमें भारतीय नवाचार और वैश्विक गुणवत्ता वाली तकनीक जरूरतमंद मरीजों को किफायती दर पर उपलब्ध हो।
सम्मेलन में डॉ. गौरव शंकर प्रधान ने कहा कि किसी उपकरण की उपलब्धता तभी सार्थक है, जब चिकित्सक, तकनीशियन और अन्य स्वास्थ्यकर्मी उसका सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल करने में सक्षम हों। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के संयुक्त निदेशक डॉ. शैलेश कुमार यादव ने कहा कि नई चिकित्सा तकनीकों को मरीजों तक पहुंचाने के लिए नैदानिक प्रभावशीलता के साथ उचित वित्तपोषण और प्रतिपूर्ति व्यवस्था जरूरी है।
डॉ. नेहा दुमका और डॉ. जशवंतसिंह परमार समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी स्वास्थ्य प्रणाली में तकनीक की उपयोगिता, लागत-प्रभावशीलता, प्रशिक्षण, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और वंचित क्षेत्रों तक मेडटेक पहुंचाने पर विचार रखे।