

Manoj Chavan Indian U20 Javelin Throw: कभी खेतों में पत्थर फेंककर नारियल तोड़ने वाला एक लड़का आज देश के उभरते हुए भाला फेंक खिलाड़ियों में अपनी जगह बना चुका है। हाथों की वही ताकत अब भाले को 70 मीटर से ज्यादा दूर पहुंचा रही है, नाम है मनोज चव्हाण। 19 वर्षीय इस युवा खिलाड़ी ने मेहनत, अनुशासन और जुनून के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
भारतीय अंडर-20 भाला फेंक खिलाड़ियों में टॉप-10 में शामिल मनोज पिछले तीन साल से नागपुर को अपनी कर्मभूमि बनाकर तैयारी कर रहे हैं। क्रीड़ा प्रबोधिनी के बाद अब मिशन लक्ष्यवेध योजना से प्रशिक्षण लेकर अपने सपनों को नई उड़ान देते हुए देश के लिए पदक जीतना चाहते हैं।
1. मनोज का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 71.88 मीटर है, यह थो उन्होंने 2024 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान किया था। उस प्रदर्शन ने उन्हें भरोसा दिया कि वह देश के बड़े खिलाड़ियों की सूची में जगह बना सकते है, मनोज चव्हाण कहते हैं, 'अभी मेरा लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना है। अभ्यास में मैं 72 मीटर के आसपास थ्रो कर चुका हूं। अंडर-20 अंतरराष्ट्रीय क्वालिफिकेशन मार्क भी हासिल करने का विश्वास है।'
2. मनोज चव्हाण की दिनचर्या भी किसी बड़े खिलाड़ी जैसी है। सुबह साढ़े पांच बजे से साढ़े नौ बजे तक अभ्यास, दोपहर में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की ट्रेनिंग और शाम को फिर मैदान पर पसीना बहाना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
वह कहते हैं, 'मिशन लक्ष्यवेध में सुविधाएं अच्छी मिल रही है। पहले क्रीडा प्रबोधिनी में भी काफी मदद मिली। अभी कोच इशिता रॉय के मार्गदर्शन में तकनीक और फिटनेस पर ज्यादा काम हो रहा है। इससे लगातार सुधार हो रहा है।'
हर खिलाड़ी की तरह मनोज चव्हाण का भी सपना है- देश के लिए खेलना, वह कहते हैं, 'मैं देश के महान भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा को अपना आदर्श मानता हूं। उन्हें
देखकर ही आगे बढ़ रहा हूं। मेरा सपना है कि मैं भी भारत के लिए उनकी तरह मेडल जीतू, मनोज चव्हाण के पिता संभाजी चव्हाण मूलतः कोल्हापुर में मेहनत-मजदूरी कर परिवार
संभालते हैं, घर से दूर इकलौता बेटा अपने सपने के लिए संघर्ष कर रहा है और परिवार उसकी सफलता की उम्मीद लगाए बैठा है।
मनीज ने हाल ही में नागपुर में हुई राज्य स्तरीय भाला फेंक प्रतियोगिता में भी सबसे लंबा थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। नागपुर में कड़ी तैयारी कर रहे मनोज चव्हाण अब 18 अगस्त से होने वाली इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-13 में अपनी चुनौती पेश करेंगे।
प्रतियोगिता के लिए उनका चयन हो चुका है और वह इसे अपने प्रदर्शन को अगले स्तर तक ले जाने का बड़ा मौका मान रहे हैं। इसके लिए वह लगातार अभ्यास कर रहे हैं। अभी 72 मीटर के आसपास थ्रो कर चुके मनोज चव्हाण की नजर अब स्पर्धा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर है।
अब मनोज चव्हाण का लक्ष्य अंडर-20 अंतरराष्ट्रीय क्वालिफिकेशन मार्क हासिल कर भारतीय टीम की दावेदारी मजबूत करना है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना है।
मनोज चव्हाण बताते हैं, 'मैंने 2022 में जेवलिन थ्रो शुरू किया था। इससे पहले मैं 100 मीटर दौड़ करता था। बचपन में खेतों में नारियल तोड़ने के लिए पत्थर फेंकने की आदत थी। स्कूल गेम्स के दौरान कोच ने जेवलिन और डिस्कस लेने के लिए कहा।
इसके बाद भाला फेंकना अच्छा लगने लगा और मैंने इसी को अपना लक्ष्य बना लिया।' शुरुआत में रास्ता आसान नहीं था। पहले साल डिवीजन स्तर पर सफलता नहीं मिली, लेकिन मनोज चव्हाण ने हार नहीं मानी। लगातार अभ्यास किया और अगले ही साल राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
कोच इशिता रॉय कहती 'मनोज चव्हाण बहुत मेहनती खिलाड़ी है। उसमें अनुशासन, समर्पण, मेहनत और निरंतरता है। TI खिलाड़ी के तौर पर उसका व्यवहार भी बहुत अच्छा है।
अगर वह ऐसे ही मेहनत करता रहा तो निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा।' हाल फिलहाल मनोज चव्हाण के प्रदर्शन में काफी सुधार आया है अब उसका थी पहले से करीब 12 मीटर बढ़ गया है, जो उसे जल्द ही इंटरनेशनल के दरवाजे तक ले जाएगा।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से जयदीप रघुवंशी की रिपोर्ट