नागपुर में महावितरण की तानाशाही: एवरेज बिलिंग और अधिकारियों की मनमानी से भटके उपभोक्ता, जबरन वसूल रहे भारी बिल

Nagpur Mahavitaran Average Billing: नागपुर में महावितरण पर बिना मीटर रीडिंग एवरेज बिल भेजने, दोबारा बिल जोड़कर वसूली करने और शिकायतों के समाधान में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
Mahavitaran's High-Handedness in Nagpur: Consumers Exasperated by Average Billing and Arbitrary Actions of Officials; Exorbitant Bills Being Extorted Forcibly.
नागपुर, महावितरण, बिजली बिल, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: एआई फोटो )
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Nagpur Mahavitaran Average Electricity Bill: नागपुर जिले में पारदर्शी, सक्षम व ग्राहक हित में गुणवत्तापूर्ण सेवा देने का दावा करने वाली महावितरण की नकेल कसने वाला कोई नहीं है। मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री के शहर में कंपनी तानाशाही पर उतर आई है। अनाप-शनाप बिल भेजे जा रहे हैं। जिनके घरों में 5-6 हजार रुपये का अधिकतम बिल आया करता था वहां अब 16-17 हजार रुपयों का बिल ठोका जा रहा है। अनेक शिकायतें मिल रही हैं लेकिन कंपनी के कर्णधार अपने हाथ खड़े कर रहे हैं।

एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें तो महावितरण के संबंधित कार्यालय के अधिकारियों ने अपना पल्ला ही झाड़ लिया। एक तो ग्राहक को बिना रीडिंग किये ही एवरेज बिल भेजा गया। दूसरे महीने रीडिंग ली गई और पूरे 2 महीनों का दोबारा बिल भेजा गया।

उस पर भी पिछला एवरेज बिल की रकम भी जोड़ दी गई। जब ग्राहक संबंधित कार्यालय में बिल करेक्शन करवाने पहुंचे तो टालमटोल कर भगा दिया गया। ग्राहक इधर से उधर भटकते रहे। अंततः बिजली कनेक्शन कटने के भय से पूरा का पूरा बिल उन्हें चुकाना पड़ा।

फिर शुरू हुआ चक्कर काटना

ग्राहक ने महावितरण की इस त्रुटि के सुधार के लिए संबंधित बिजली कार्यालय के चक्कर काटने शुरू किये। 2-3 चक्करों में उनकी समझ में आ गया कि जो कंपनी ग्राहक सेवा को सर्वोपरि मानने का दावा करती है उसका दावा - कितना खोखला है। हर टेबल से उन्हें टरकाया गया, एक महिला अभियंता ने तो बिल नहीं भरा तो कनेक्शन कटने का भी डर बता दिया।

वे अपनी गुहार लेकर बिल जमा करने की अंतिम तिथि तक कुछ बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचे लेकिन सभी ने पल्ला झाड़ लिया। मीटर कटने के भय से अंततः उन्हें 8 जुलाई की रात 12 बजे से पहले पूरी रकम ऑनलाइन जमा करनी पड़ी। उनका सवाल यह है कि जो 4,149 रुपये की उनसे लूट की गई है, क्या वापस मिलेगी? स्मार्ट मीटर की कैम्पिंग में जुटा है अमला एक ओर नियमित बिल जमा करने वाले ईमानदार ग्राहकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

वहीं दूसरी ओर एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने वाले स्मार्ट प्रिीपेड मीटर को लगवाने के लिए शिविरों के आयोजन में महावितरण का सारा अमला जुटा हुआ है। नये मुख्य अभियंता ने हाल ही पदभार संभाला है जिन्होंने पहले ही दिन ग्राहकों को गुणवतापूर्ण व पारदर्शी सेवा देने की बात कही थी। देखना होगा कि वे ग्राहकों की समस्याओं के निराकरण के प्रति कितनी गंभीरता दिखाते है।

कुछ ऐसा है मामला

जी-5, नानिक्स, अष्टविनायक पैराडाइज, कोराडी रोड निवासी फरीद शेख वल्द शेख सादिक जिनका ग्राहक क्रमांक 410017116855 है। इनके यहां मई महीने में मीटर की रीडिंग ही नहीं की गई जिसका बिल में भी उल्लेख है। पिछला रीडिंग 31350 यूनिट बताया गया। बिना मीटर रीडिंग लिये 311 यूनिट का एवरेज बिल 4,100 रुपयों का भेजा गया। बिल चुकाने की अंतिम तारीख 8 जून थी।

ग्राहक ने किसी कारणवश बिल नहीं भरा, उसके बाद जून महीने में उनके मीटर की रीडिंग ली गई, बिल में रीडिंग की तारीख 15 जून उल्लेखित है। पिछली रीडिंग मई महीने की ही 31350 यूनिट बताई गई और चालू रीडिंग 32814 यूनिट। चालू रीडिंग और पिछली रीडिंग के अंतर 1464 यूनिट का कुल बिल 14,889 रुपयों का हुआ।

चूंकि मई महीने में रीडिंग ली ही नहीं गई थी और 2 महीने बाद रीडिंग ली गई तो यह 1464 यूनिट 2 महीनों का होता है। लेकिन महावितरण के कर्णधारों द्वारा मई महीने का जून में भुगतान करने वाले बिल की रकम 4,100 रुपये पर भी पेनाल्टी लगाते हुए 4,149.57 रुपये बकाया बताकर जोड़ दिया। कुल 19,040 रुपयों का बिल भेजा गया।

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