

नागपुर. राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ की बैठक में मराठा समाज को कुनबी जाति का प्रमाणपत्र देने का विरोध किया गया. इस दौरान बिहार की तर्ज पर ओबीसी की जातिनिहाय जनगणना करने, देश में जनगणना करने राज्य सरकार द्वारा केंद्र से सिफारिश करने, सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को रद्द करने संबंधी सरकार द्वारा सिफारिश करने, राज्य में ओबीसी समाज के छात्रों के लिए मंजूर 72 हॉस्टल जल्द ही किराये की इमारतों में शुरू करने, जिन छात्रों को हॉस्टल में प्रवेश नहीं मिलता, उन्हें स्वाधार योजना लागू करने, बीसीए, एमसीए, पीजी डिप्लोमा इन कम्प्यूटर कमर्शियल एप्लीकेशन के लिए छात्रवृति लागू करने, मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिति कार्यक्रम में ओबीसी का समावेश करने, फ्रिशिप मिलने, विदेशी उच्च शिक्षा में छात्रवृति योजना देने, नॉन क्रिमीलेयर प्रमाणपत्र व 8 लाख रुपये आय की शर्त में से 8 लाख आय की शर्त रद्द कर केवल नॉन क्रिमिलेयर प्रमाणपत्र वाले छात्रों को योजना का लाभ देने निर्णय जारी करने, म्हाड़ा व सिडको योजना के अंतर्गत ओबीसी समाज को आरक्षण लागू करने की मांग की गई.
बैठक में ओबीसी समाज के आरक्षण से बिना छेड़छाड़ किये, मराठा समाज को स्वतंत्र आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया गया. उक्त मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो 17 सितंबर को राज्य के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर मोर्चा निकालने का निर्णय लिया गया. बैठक में डॉ. बबनराव तायवाडे, शरद वानखेडे, गुणेश्वर आरिकर, सुषमा भड, वृद्ध ठाकरे, साधना बोरकर, नंदा देशमुख, रेखा बारहाते, अनिता ठेंगरे, अनंता भारसाकले, विक्रांत मानकर, परमेश्वर राऊत, अविनाश चागरे, प्रवीण डेहनकर आदि उपस्थित थे.