

नागपुर. रामटेक के पूर्व सांसद कृपाल तुमाने और यवतमाल की पूर्व सांसद भावना गवली को शिवसेना शिंदे गुट ने विधान परिषद का टिकट देकर पुनर्वास किया है। इन दोनों का टिकट लोकसभा चुनाव में कट गया था। ऐसे में अब पूर्व सांसद तुमाने और गवली को विधान परिषद का शिंदे गुट ने उम्मीदवार बनाया है। दोनों पूर्व सांसदों के टिकट की घोषणा देर रात की गई। मुंबई में मंगलवार को फार्म भरने की अंतिम तारीख है।
लोकसभा चुनाव में शिंदे गुट ने तुमाने की टिकट काटकर राजू पारवे को दी थी और गवली की टिकट काटकर राजश्री पाटिल को टिकट दी थी। इन दोनों सीटों पर शिवसेना शिंदे गुट को हार का सामना करना पड़ा था। इससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी थी। पार्टी ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने और पार्टी में एकजुटता लाने के लिए इस बार दोनों को मैदान में उतारा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधान परिषद चुनाव के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नेता एवं पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे, पूर्व विधायक योगेश तिलेकर, अमित गोरखे और सदाभाऊ खोत को अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने पूर्व राज्यमंत्री परिणय फुके को भी उम्मीदवार बनाया है, जिसके चलते वह अपने ओबीसी वोट बैंक को फिर से साध सकेगी। फुके पिछले कई वर्षों से ओबीसी समाज के नेता के रूप में उभरकर आए हैं। विशेष रूप से विदर्भ के ओबीसी समाज में उनकी जबरदस्त पकड़ भी है। पिछले कुछ समय से राज्य में चले आ रहे मराठा-ओबीसी में कटुता और गतिरोध को दूर करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। लोकसभा चुनाव में ओबीसी समाज का एक बड़ा तबका भाजपा से दूर हो गया था अब विधान परिषद में उम्मीदवारी मिलने के बाद फुके पर इस वोट बैंक को मजबूत करने की जिम्मेदारी आ जाएगी।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के विधानपरिषद के 11 सदस्य 27 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इन 11 सीटों पर 12 जुलाई को वोटिंग होगी और उसी दिन मतगणना कर नतीजे घोषित किए जाएंगे। विधानसभा के सदस्यों की संख्या को देखते हुए बीजेपी के 5 उम्मीदवार, एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 2 उम्मीदवार, अजित पवार की एनसीपी के 2 उम्मीदवार और महाविकास अघाड़ी के 2 उम्मीदवार जीत सकते हैं।
जिन सदस्यों का कार्यकाल 27 जुलाई को खत्म हो रहा है, उनमें विजय गिरकर, निलय पाटिल, रमेश पाटिल, राम राव पाटिल (बीजेपी) महादेव जानकर (राष्ट्रीय समाज पक्ष), अनिल परब (शिवसेना ठाकरे गुट), मनीषा कायंदे (शिवसेना शिंदे गुट), डॉ. वजाहत मिर्झा और डॉ. प्रज्ञा सातव (कांग्रेस), बाबाजानी दुरानी (राष्ट्रवादी), जयंत पाटिल (शेकाप) का नाम शामिल है।