नागपुर जिला समिति का बड़ा फैसला: काटोल नगराध्यक्ष का कुनबी जाति का दावा खारिज, 3 लोगों ने की थी शिकायत

Nagpur Caste Certificate: काटोल नगराध्यक्ष अर्चना देशमुख के कुनबी जाति दावे को जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने खारिज कर दिया। इस फैसले से उनकी चुनावी पात्रता व राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है
Major decision by Nagpur District Committee: Katol Municipal Council President's Kunbi caste claim rejected; three individuals had lodged complaints.
अर्चना देशमुख,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Updated on

Maharashtra Politics: जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए काटोल की नगराध्यक्ष अर्चना भास्करराव देशमुख (अर्चना राहुल देशमुख) के 'कुणबी' जाति के दावे को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। यह जाति प्रमाणपत्र नागपुर जिले के काटोल नगर परिषद चुनाव के प्रयोजन से प्रस्तुत किया गया था जिसके अवैध घोषित होने से उनकी चुनावी उम्मीदवारी पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

अर्चना देशमुख ने दावा किया था कि वे कुणबी (अन्य पिछड़ा वर्ग) जाति से ताल्लुक रखती हैं और इसके लिए उन्होंने उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ), जलगांव जामोद द्वारा 4 नवंबर 2025 को जारी किया गया जाति प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए प्रस्तुत किया था।

अर्चना देशमुख की शकील देशमुख और शिकायतकर्ताओं की एड. महेश धात्रक ने पैरवी की। इस दावे के खिलाफ 3 लोगों कल्पना समीर उमप, राजू मधुकरराव चार्ड और किशोर शंकरराव गाडवे ने समिति के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं का मुख्य आरोप था कि अर्चना देशमुख मूल रूप से 'मराठा' (खुली श्रेणी) जाति से हैं और उन्होंने गलत तरीके से कुणबी जाति का प्रमाणपत्र प्राप्त किया है।

खतरे में पद

चूंकि यह प्रमाणपत्र काटोल नगर परिषद चुनाव के लिए सत्यापित कराया जा रहा था, अतः प्रमाणपत्र के अवैध घोषित होने से अर्चना देशमुख को एक बड़ा झटका लगा है और आरक्षित सीट पर उनका पद स्वतः ही खतरे में पड़ गया है।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

दक्षता पथक की जांच और समिति की सुनवाई के दौरान कई अहम सबूत सामने आए, जिन्होंने देशमुख के दावे को झूठा साबित कर दिया। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि अर्चना देशमुख के पिता के स्कूली प्रवेश प्रमाणपत्र (03.07.1962) में उनकी जाति 'मराठा' दर्ज है। पिता की जन्मतिथि 14 जुलाई 1945 है और उनके रिकॉर्ड में भी जाति' मराठा' ही पाई गई। इसी तरह स्वयं अर्चना देशमुख के प्राथमिक कन्या स्कूल के रिकॉर्ड में भी उनकी जाति 'मराठा' दर्ज है।

अर्चना के दादा रुस्तमराव विठ्ठलराव देशमुख के मृत्यु प्रमाणपत्र (01.12.1992) में किसी भी जाति का कोई उल्लेख नहीं था जिससे कुणबी जाति का दावा साबित नहीं हो सका। महाराष्ट्र शासन के नियमानुसार कुणबी जाति साबित करने के लिए 13 अक्टूबर 1967 से पूर्व के ठोस राजस्व या शैक्षणिक प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं लेकिन आवेदक द्वारा ऐसे कोई भी वैध प्रमाण पेश नहीं किये जा सकें।

जाच में यह भी सामने आया कि वंशावली में 'विटु' और 'विठ्ठलराव' नामों के बीच भिन्नता थी लेकिन आवेदक ने यह साबित करने के लिए कोई राजपत्र या शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया कि ये दोनों एक ही व्यक्ति है।

Navbharat Live
navbharatlive.com