

IIM नागपुर के MBA छात्र प्रयास ठाकुर ने निलंबन आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 के निलंबन आदेश और संबंधित समितियों के पूर्व निर्णय रद्द कर दिए।
छात्र को तत्काल कक्षाओं में शामिल होने और हॉस्टल में रहने की अनुमति दी गई।
समिति को चार सप्ताह के भीतर कारण सहित नया आदेश पारित करना होगा।
IIM Nagpur Student Suspension: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) द्वारा जारी निलंबन के आदेश को चुनौती देते हुए दूसरे वर्ष के एमबीए छात्र प्रयास ठाकुर की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
याचिका पर दोनों पक्षों की लंबी दलीलों के बाद न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन होने का हवाला देते हुए संस्थान के निदेशक द्वारा 3 अक्टूबर 2026 को पारित निलंबन आदेश तथा अनुशासनात्मक समितियों के पूर्व निर्णयों को रद्द कर दिया।
साथ ही कोर्ट ने संस्थान को अंतरिम निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता छात्र को तुरंत कक्षाओं में उपस्थित होने और हॉस्टल में रहने की अनुमति दी जाए।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता प्रयास ठाकुर आईआईएम, नागपुर में सत्र 2025-2027 के एमबीए पाठ्यक्रम के दूसरे वर्ष के छात्र हैं। 30 अगस्त 2026 को दोपहर लगभग 2।40 बजे, जब वे अपनी कक्षा में थे।
तब छात्र गतिविधि कार्यालय के प्रभारी व अन्य अधिकारियों ने हॉस्टल में उनके कमरे की तलाशी ली। यह कमरा 2 अन्य सहपाठियों के साथ साझा था। यह तलाशी छात्र की अनुपस्थिति और स्टूडेंट काउंसिल के किसी प्रतिनिधि के बिना ली गई।
आरोप लगाया गया कि उनके बिस्तर के तकिये के नीचे से एक प्रतिबंधित पदार्थ बरामद हुआ। हालांकि उसकी प्रकृति, मात्रा या किसी प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के बिना ही उन्हें दोषी ठहरा दिया गया।
इसके बाद बिना कोई पूर्व कारण बताओ नोटिस दिए। छात्र गतिविधि समिति के अध्यक्ष ने छात्र को पाठ्यक्रम से निष्कासित कर दिया। छात्र ने इस निर्णय के खिलाफ अकादमिक कार्यक्रम एवं शिकायत निवारण समिति के समक्ष प्रथम अपील दायर की, लेकिन समिति ने कार्रवाई को बरकरार रखा।
तत्पश्चात द्वितीय अपील भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के निदेशक के समक्ष की गई, जिन्होंने सजा कम करते हुए छात्र को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एमबीए प्रोग्राम के टर्म 5 और टर्म 6 से निलंबित कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राधिका बजाज ने पैरवी की।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि छात्र को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर न देकर प्राकृतिक न्याय के नियमों की अनदेखी की गई। कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2026 के निदेशक के निलंबन आदेश तथा छात्र गतिविधि समिति व शिकायत निवारण समिति के पूर्व आदेशों को खारिज कर दिया।
अदालत ने मामले को वापस छात्र गतिविधि समिति के अध्यक्ष के पास भेजते हुए निर्देश दिया कि वे छात्र को साक्ष्य और बचाव प्रस्तुत करने का पूरा मौका दें तथा 4 सप्ताह के भीतर एक कारण सहित तर्कसंगत आदेश पारित करें। तब तक छात्र को हॉस्टल में रहने और कक्षाएं अटेंड करने की अनुमति प्रदान की गई है।