

Cotton Fire Nagpur: महाराष्ट्र के नागपुर जिले से एक भीषण अग्निकांड की खबर सामने आई है, जहाँ कुही तालुका स्थित एक जिनिंग फैक्ट्री में लगी आग ने देखते ही देखते तबाही मचा दी। इस हादसे में न केवल 18,000 क्विंटल (लगभग 1800 टन) कपास जलकर राख हो गई, बल्कि एक 8 साल का मासूम बच्चा भी आग की लपटों में फंसकर गंभीर रूप से झुलस गया। आर्थिक रूप से इस नुकसान का आकलन करीब ₹12 करोड़ किया जा रहा है, जिससे किसानों और व्यापारियों की कमर टूट गई है।
कपास की अत्यधिक ज्वलनशीलता के कारण आग ने इतनी तेजी पकड़ी कि दमकल कर्मियों को इसे नियंत्रित करने में घंटों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
हादसा कुही-अम्भोरा रोड पर स्थित कल्पना जिनिंग फैक्ट्री में गुरुवार शाम को हुआ। जिस वक्त आग लगी, कारखाने में काम जोरों पर था। धुएं का गुबार उठते ही मजदूरों के बीच अफरा-तफरी मच गई। इसी भगदड़ के दौरान 8 वर्षीय रोहन सुरेश दुधवे आग की चपेट में आ गया।
रेस्क्यू और उपचार: घायल बच्चे को तुरंत नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH) ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चा काफी झुलस गया है, लेकिन फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है।
यातायात ठप: आग की लपटें सड़क तक पहुँचने के कारण पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से कुही-अम्भोरा मार्ग पर यातायात को कुछ समय के लिए पूरी तरह रोक दिया था।
कारखाने में कपास का भारी स्टॉक होने के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। कुही, मौदा और उमरेड से दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन कपास के ढेरों के अंदर सुलगती आग देर रात तक धुआं उगलती रही।
किसानों का नुकसान: जलकर खाक हुई 18,000 क्विंटल कपास स्थानीय किसानों की मेहनत का नतीजा थी, जिसे व्यापारियों ने भंडारण के लिए रखा था।
बाजार पर असर: इतनी बड़ी मात्रा में कपास के जलने से स्थानीय बाजार में आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा कर नुकसान का पंचनामा करने के निर्देश दिए हैं।
संभावित कारण: प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।
सेफ्टी ऑडिट: प्रशासन अब इस बात की जांच करेगा कि क्या कारखाने में पर्याप्त 'अग्नि सुरक्षा' (Fire Safety) उपकरण मौजूद थे और क्या नियमों का पालन किया गया था। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।